ब्रह्मोस के आगे बेदम हुआ चीन का डिफेंस सिस्टम, पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों ने पाकिस्तान के भीतर मौजूद चीनी एयर डिफेंस सिस्टम्स HQ-9B और HQ-16 को बेअसर साबित कर दिया। इन हमलों के बाद पाकिस्तान में तैनात चीनी YLC-8E एंटी-स्टेल्थ रडार भी पूरी तरह नष्ट हो गया। चीन ने इस असफलता को स्वीकारते हुए माना कि उनके ये सिस्टम्स ब्रह्मोस जैसी मैक 3 गति वाली और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलों को रोकने में सक्षम नहीं हैं। इससे पाकिस्तान में चीनी हथियारों को लेकर भारी असंतोष फैल गया है।
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त कार्रवाई की। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों के साथ-साथ फ्रांस की SCALP मिसाइलें और इजराइली हारोप ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। इन हमलों ने पाकिस्तान के डिफेंस तंत्र की पोल खोल दी और उसकी रणनीतिक अक्षमता उजागर कर दी।
चीनी मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी यह माना जा रहा है कि पाकिस्तान इन डिफेंस सिस्टम्स के प्रदर्शन से असंतुष्ट है और नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान अब तुर्की के SİPER 1 और SİPER 2 जैसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम्स में रुचि दिखा रहा है, जो इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और बेहतर रडार टेक्नोलॉजी से लैस हैं।
पाकिस्तान अपनी डिफेंस जरूरतों के लिए चीन पर 82% तक निर्भर रहा है, लेकिन इस ऑपरेशन के बाद उसका भरोसा डगमगा गया है। HQ-9B की तुलना अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम से की जाती रही है, लेकिन यूक्रेन युद्ध में पैट्रियट की सफलता के उलट चीन का सिस्टम अब गंभीर आलोचना के घेरे में है।
ब्रह्मोस की तीन गुना ध्वनि से तेज गति, बेहद नीचे उड़ने की क्षमता और रैमजेट इंजन टेक्नोलॉजी उसे दुनिया के लगभग सभी एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए चुनौती बना देती है। HQ-9B की 300 किमी और HQ-16 की 40 किमी रेंज भी इसका मुकाबला नहीं कर पाई। इससे न सिर्फ चीन की साख को झटका लगा है, बल्कि पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा नीति पर नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है
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