“जब श्रीदेवी ने बोनी कपूर से तोड़ दिए थे सारे रिश्ते… 180 दिनों तक नहीं की बात, जानिए क्यों थी इतनी नाराज़”
बॉलीवुड की चांदनी कही जाने वाली श्रीदेवी और मशहूर फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर की लव स्टोरी जितनी दिलचस्प थी, उतनी ही उलझनों से भरी भी थी। एक वक्त ऐसा भी आया जब प्यार और रिश्ते के बीच की डोर इतनी कमजोर हो गई थी कि श्रीदेवी ने बोनी कपूर से पूरे छह महीने तक बात नहीं की थी।
लेकिन ऐसा क्या हुआ था जिसने दोनों के रिश्ते में ऐसी खामोशी ला दी थी? आइए, जानते हैं उस किस्से की पूरी कहानी…
सालों पहले जब बोनी कपूर पहले से शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे भी थे, उसी दौरान उन्हें श्रीदेवी से प्यार हो गया। बोनी कपूर, श्रीदेवी को अपनी फिल्मों में लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। ‘मिस्टर इंडिया’ के लिए जब श्रीदेवी की मां ने 10 लाख रुपये की फीस मांगी, तो बोनी कपूर ने बिना झिझक 11 लाख रुपये दे दिए — ये उस समय एक बड़ी रकम थी।
बोनी का झुकाव साफ था और वक्त के साथ उन्होंने अपने दिल की बात भी कह दी। एक बार श्रीदेवी और उनकी मां को बोनी के साथ डिनर पर जाना था, लेकिन श्रीदेवी की मां की तबीयत खराब हो गई, और फिर बोनी और श्रीदेवी अकेले ही डिनर पर गए। उसी रात जब बोनी श्रीदेवी को घर छोड़ने जा रहे थे, उन्होंने एक भावुक पल में उन्हें प्रपोज कर दिया।
लेकिन श्रीदेवी को ये बात इतनी नागवार गुज़री कि उन्होंने बोनी से 180 दिनों तक एक भी शब्द नहीं बोला।
बोनी कपूर ने इस घटना को सालों बाद एक इंटरव्यू में साझा करते हुए कहा था, “मुझे उन्हें मनाने में पांच-छह साल लग गए थे। जब मैंने उन्हें प्रपोज किया, तो उन्होंने मुझसे छह महीने तक बात नहीं की। उन्होंने कहा था – तुम शादीशुदा हो, तुम्हारे दो बच्चे हैं, तुम मुझसे ऐसा कैसे कह सकते हो?”
श्रीदेवी अपने सिद्धांतों को लेकर काफी सख्त थीं। बोनी की यह हरकत उन्हें धोखे जैसी लगी, और उन्होंने अपने रिश्ते से पूरी तरह किनारा कर लिया। लेकिन कहते हैं ना, समय के साथ घाव भर जाते हैं। पांच साल की मेहनत और सच्चे इरादों के बाद बोनी कपूर ने श्रीदेवी का दिल जीत ही लिया।
1996 में दोनों ने शादी कर ली और इस रिश्ते से दो बेटियां हुईं — जान्हवी कपूर और खुशी कपूर। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। फरवरी 2018 में श्रीदेवी का दुखद निधन हो गया और बॉलीवुड ने अपनी सबसे चमकदार सितारा खो दिया।
लेकिन श्रीदेवी और बोनी की ये कहानी आज भी ये सिखाती है — प्यार सिर्फ एक इमोशन नहीं, बल्कि एक जंग है… खुद से, हालात से और रिश्तों की उलझनों से। और अगर आप वाकई सच्चे हैं, तो कभी-कभी छः महीने की खामोशी भी एक उम्र की मोहब्बत में बदल जाती है।
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