महाराष्ट्र बीएमसी चुनाव 2026 के नतीजों के बाद मुंबई की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दशकों से मुंबई महानगरपालिका पर चला आ रहा ठाकरे परिवार का वर्चस्व इस बार टूट गया और बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई। चुनावी नतीजों ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) को झटका दिया है, जिसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
संजय राउत ने बीएमसी चुनाव परिणामों को लेकर अपनी ही पार्टी के भीतर मौजूद ‘जयचंदों’ को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कुछ अंदरूनी लोगों की वजह से शिवसेना को नुकसान उठाना पड़ा और इसी का फायदा बीजेपी को मिला। राउत का दावा है कि अगर कुछ सीटों पर मामूली अंतर से हार नहीं होती, तो आज मुंबई का राजनीतिक दृश्य बिल्कुल अलग होता।
उन्होंने यह भी कहा कि बीएमसी सदन में बीजेपी-शिंदे गुट का बहुमत बेहद सीमित है। संजय राउत के मुताबिक, सत्ता पक्ष के पास केवल चार सीटों का बहुमत है, जबकि विपक्ष की ताकत लगभग बराबर की है। ऐसे में उन्होंने यह दावा किया कि विपक्ष के पास इतने नंबर हैं कि जरूरत पड़ी तो कभी भी तख्तापलट संभव है, हालांकि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करती है।
राउत ने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी संसाधनों और सत्ता के बल पर चुनाव जीतती है और विपक्षी दलों को तोड़कर अपने पक्ष में करती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री होने के नाते बीजेपी के पास पूरी मशीनरी थी, इसलिए यह मानना गलत होगा कि यह पूरी तरह एकतरफा जीत है। उनके अनुसार, बीएमसी में मुकाबला बराबरी का रहा है।
कुल मिलाकर, बीएमसी चुनाव परिणामों के बाद शिवसेना (UBT) आक्रामक रुख में नजर आ रही है। संजय राउत के बयानों से साफ है कि आने वाले दिनों में मुंबई महानगरपालिका की राजनीति में टकराव तेज हो सकता है और विपक्ष सत्ता पक्ष की हर चाल पर नजर बनाए रखने की तैयारी में है।
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