May 1, 2026

बिहार के इस गांव से गायब हो गए सभी पुरुष, आखिर किस बात का सता रहा डर?

दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में हालिया हिंसक घटना के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। पैसे के विवाद को लेकर हुई झड़प ने ऐसा रूप ले लिया कि गांव के करीब 70 घरों से सभी पुरुष गायब हो गए हैं। मौजूदा समय में इन घरों में एक भी पुरुष सदस्य मौजूद नहीं है। गांव में केवल महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे रह गए हैं, जो डर और अनिश्चितता के बीच दिन काट रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर रखा है, लेकिन इसके बावजूद भय का माहौल कम नहीं हो सका है।

हिंसा के बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए 70 नामजद ब्राह्मणों समेत लगभग 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इसी एफआईआर और संभावित गिरफ्तारी के डर से गांव के पुरुषों ने अपने घर छोड़ दिए। ग्रामीणों का कहना है कि पुरुषों के गांव से चले जाने के कारण सामान्य जीवन पूरी तरह ठप हो गया है। दुकानें बंद हैं, जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित है और लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई किसी अनहोनी की आशंका में जी रहा है।

गांव की महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा। एक महिला ने कहा कि हरिनगर में हमेशा आपसी भाईचारा रहा है और लोग मिल-जुलकर रहते थे, लेकिन अचानक हालात इतने बिगड़ गए कि पूरा गांव दो हिस्सों में बंटा हुआ नजर आने लगा। महिलाओं के मुताबिक, पुरुषों की गैरमौजूदगी ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं, क्योंकि वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पंचायत के मुखिया विमल चंद्र खान का कहना है कि यदि 30 जनवरी को हुई शुरुआती घटना के बाद पुलिस समय रहते सख्त कार्रवाई करती, तो 31 जनवरी को इतनी बड़ी हिंसा नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि देरी के कारण हालात बेकाबू हो गए। वहीं, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामले की जांच जारी है और पुलिस किसी भी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी।

फिलहाल हरिनगर गांव पुलिस निगरानी में है, लेकिन ग्रामीणों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। गांव के लोग चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो, निर्दोषों को राहत मिले और जल्द से जल्द सामान्य जीवन बहाल हो, ताकि डर के साए से बाहर निकलकर वे फिर से अपने गांव को पहले जैसा शांत और सुरक्षित बना सकें।

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