April 30, 2026

बिहार में थानाध्यक्ष पर रंगदारी और मारपीट का सनसनीखेज आरोप, FIR दर्ज और आवास सील—पीड़ित युवक ने सुनाई आपबीती

बिहार से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे पुलिस विभाग की छवि को हिलाकर रख दिया है। क्या सचमुच एक थानाध्यक्ष पर ही रंगदारी व मारपीट जैसे संगीन आरोप हो सकते हैं? इस सवाल ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मामला है सहरसा जिले के बैजनाथपुर थाना के थानाध्यक्ष अमर ज्योति पर लगे आरोपों का, जिन्होंने एक युवक को जबरन उठाकर थाने में बंद किया, उसकी बेरहमी से पिटाई की और लगभग 79 हजार रुपये अवैध तरीके से वसूले। आरोप इतने गंभीर थे कि जांच के बाद थानाध्यक्ष के सरकारी आवास को सील कर दिया गया और उनके खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई।

पीड़ित युवक अविनाश कुमार, जो मूल रूप से मधेपुरा के परमानंदपुर पथराहा गांव के रहने वाले हैं और पटना में बीपीएससी की तैयारी कर रहे हैं, ने बताया कि 3 मई को जब वे पटना से सहरसा आए थे, तभी उनकी जिंदगी का सबसे भयानक अनुभव शुरू हो गया। अविनाश ने आरोप लगाया कि उन्हें स्कॉर्पियो में जबरन बैठाकर मुसहनियां और पथराहा की ओर ले जाया गया, जहां रास्ते भर उन्हें गाली-गलौज और धमकियां दी गईं। धमकी दी गई कि अगर वे एक लाख रुपये नहीं देंगे तो उनके बैग में स्मैक और कोरेक्स जैसी नशीली वस्तुएं डालकर जेल भेज दिया जाएगा। यह सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे कि ऐसा आरोप एक थानाध्यक्ष पर लगना कितना गंभीर और चौंकाने वाला है।

इस पूरे मामले में सहरसा एसपी हिमांशु प्रियदर्शी ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने मामले की जांच सदर एसडीपीओ आलोक कुमार से करवाई। जांच रिपोर्ट में इन आरोपों की पुष्टि होते ही एसपी ने बुधवार को थानाध्यक्ष अमर ज्योति को लाइन हाजिर कर दिया। गुरुवार को दंडाधिकारी की मौजूदगी में थानाध्यक्ष के सरकारी आवास की तलाशी ली गई और उसे सील कर दिया गया। साथ ही, थाने में तैनात अन्य पुलिसकर्मियों और कथित बिचौलियों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है। इस मामले की आगे की जांच की जिम्मेदारी सिमरी बख्तियारपुर एसडीपीओ मुकेश कुमार ठाकुर को सौंपी गई है।

यह घटना न सिर्फ पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि आम लोगों में पुलिस पर भरोसा कम करने वाली घटनाओं की लंबी फेहरिस्त में एक और काला धब्बा जुड़ गई है। पीड़ित अविनाश ने अपने आवेदन में विस्तार से बताया कि कैसे उनके साथ अमानवीय व्यवहार हुआ और वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं। अब जनता की निगाह इस पर है कि क्या जांच सही निष्कर्ष निकाल पाएगी और दोषी अधिकारियों को सजा मिलेगी।

यह मामला बिहार पुलिस के लिए एक चेतावनी है कि उनके भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार और गलत व्यवहार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता के बीच न्याय और सुरक्षा की भावना बनाए रखने के लिए इस घटना की निष्पक्ष जांच और शीघ्र कार्रवाई बेहद जरूरी है।

क्या अमर ज्योति जैसे अधिकारी कानून व्यवस्था को कायम रख पाएंगे, या यह मामला न्याय व्यवस्था में गंभीर प्रश्न खड़े करेगा? आने वाले दिनों में इस मामले की जांच रिपोर्ट और कोर्ट के निर्णय पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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