April 18, 2026

भारतीय तेल कंपनियों को जहां बेस्ट डील मिलेगी, वहां से खरीदारी जारी रहेगी: राजदूत विनय कुमार

रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने साफ कर दिया है कि भारतीय तेल कंपनियां किसी भी दबाव में नहीं आएंगी और जहां उन्हें सबसे अच्छी डील मिलेगी, वहीं से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली की प्राथमिकता देश के 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रविवार को रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS को दिए इंटरव्यू में राजदूत ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाले कदम उठाता रहेगा और ऊर्जा क्षेत्र में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

राजदूत ने यह भी बताया कि रूस के साथ भारत के सहयोग से वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आई है। उनका कहना था कि तेल व्यापार पूरी तरह ‘‘व्यावसायिक आधार’’ पर होता है और भारतीय कंपनियां हमेशा बाजार के हिसाब से निर्णय लेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार संबंध आपसी हितों और बाजार कारकों पर आधारित हैं। उनका कहना था कि यह सब भारत के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के व्यापक उद्देश्य के तहत किया जा रहा है।

गौरतलब है कि अमेरिका लगातार भारत पर रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदने को लेकर दबाव बना रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। वॉशिंगटन का कहना है कि भारत को रूस से तेल खरीदने की बजाय वैकल्पिक स्रोतों पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता जनता की जरूरतें हैं, न कि बाहरी दबाव।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद स्पष्ट किया था कि किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य देश की आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख न केवल उसकी स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाता है बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में उसकी बढ़ती ताकत को भी उजागर करता है।

कुल मिलाकर, राजदूत विनय कुमार के बयान ने यह संदेश दे दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा नीति पर किसी दबाव में नहीं आएगा और जहां से उसे सबसे अच्छी कीमत और स्थिर आपूर्ति मिलेगी, वहीं से तेल खरीदता रहेगा। यह फैसला भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जनता की भलाई सुनिश्चित करना है।

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