भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते पर कल होंगे हस्ताक्षर, सस्ते होंगे आयातित कार, व्हिस्की और बढ़ेगा भारतीय निर्यात

भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर कल लंदन में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस व्यापक आर्थिक एवं व्यापार करार के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को नई ऊंचाई देने की तैयारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में यह समझौता साइन किया जाएगा। इस करार को लेकर दोनों देशों के बीच 6 मई को ही बातचीत पूरी हो चुकी थी। अब यह समझौता भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने और उपभोक्ताओं को सस्ते आयात का लाभ देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और उनके ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन रेनॉल्ड्स इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। हालांकि इसे लागू होने से पहले ब्रिटिश संसद की मंजूरी जरूरी होगी, जिसमें लगभग एक साल का वक्त लग सकता है। समझौते में वस्त्र, चमड़ा, जूते, आभूषण, वाहन कलपुर्जे, समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए बड़े निर्यात अवसर खुलेंगे। वहीं ब्रिटेन से आने वाली व्हिस्की, कार, सौंदर्य प्रसाधन, चिकित्सा उपकरण और चॉकलेट जैसे उत्पाद सस्ते होंगे।

FTA के तहत 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा। ब्रिटिश व्हिस्की और जिन पर आयात शुल्क को पहले 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा, और अगले 10 वर्षों में यह शुल्क घटकर 40 प्रतिशत रह जाएगा। वहीं कारों पर शुल्क को 100 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इससे न केवल व्यापार को नई गति मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के कारोबारियों और उपभोक्ताओं को भी इसका फायदा मिलेगा।

भारत और ब्रिटेन के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते को लेकर भी बातचीत पूरी हो चुकी है। इससे ब्रिटेन में सीमित अवधि के लिए काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को दोहरे अंशदान से राहत मिलेगी। यानी उन्हें भारत और ब्रिटेन दोनों जगह सामाजिक सुरक्षा कोष में योगदान नहीं देना पड़ेगा, जिससे उनकी आय पर बोझ घटेगा।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का ब्रिटेन को निर्यात 12.6% बढ़कर 14.5 अरब डॉलर पहुंच गया है, जबकि आयात 8.6 अरब डॉलर रहा। कुल द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में बढ़कर 21.34 अरब डॉलर हो गया है। इस समझौते के जरिए दोनों देश व्यापार को 2030 तक 120 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

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