April 30, 2026

भारत में गरीबी पर बड़ी जीत: मोदी सरकार के 11 वर्षों में गरीबों की संख्या में भारी गिरावट, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में खुलासा

मोदी सरकार के 11 साल के शासन काल में भारत ने गरीबी के खिलाफ निर्णायक सफलता हासिल की है। वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-12 में भारत की गरीब आबादी 27.1% थी, जो अब 2022-23 में घटकर मात्र 5.3% रह गई है। ये आंकड़ा विश्व बैंक की नई गरीबी रेखा (तीन डॉलर प्रतिदिन) के आधार पर है, जिसे हाल ही में महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए संशोधित किया गया है।

 

मुफ्त राशन और खाद्य योजनाएं बनीं बदलाव की रीढ़

रिपोर्ट में कहा गया है कि मुफ्त और रियायती खाद्यान्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, ने इस गिरावट में बड़ी भूमिका निभाई है। इससे न केवल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर कम हुआ, बल्कि खाद्य सुरक्षा में भी सुधार आया।

 

आंकड़ों की गहराई:

2011-12 में अत्यधिक गरीबी (2.15 डॉलर प्रतिदिन से कम आय) 16.2% थी, जो 2022-23 में 2.3% रह गई।

ग्रामीण भारत में यह दर 18.4% से घटकर 2.8%, और

शहरी भारत में 10.7% से घटकर 1.1% हो गई।

17.1 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे से ऊपर उठ चुके हैं।

ग्रामीण-शहरी गरीबी का अंतर भी 7.7% से घटकर 1.7% रह गया।

वैश्विक पटल पर भारत की स्थिति मजबूत

जबकि वैश्विक स्तर पर अत्यधिक गरीबों की संख्या 12.5 करोड़ बढ़ी, भारत में गरीबी में तेज गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत करता है कि भारत में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और आर्थिक विकास का असर आम लोगों तक पहुंचा है।

 

चिंताएं भी बनी हुई हैं

हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर वैश्विक अनिश्चितताएं और नीतिगत अस्थिरता बनी रही, तो भारत की निर्यात मांग प्रभावित हो सकती है और निवेश में सुधार में देरी हो सकती है। फिर भी, अनुमान है कि 2027-28 तक भारत की अर्थव्यवस्था दोबारा संभावित विकास स्तर पर पहुंच सकती है।

भारत में गरीबी के खिलाफ यह सफलता सिर्फ आर्थिक आंकड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह वेलफेयर स्कीम्स, फूड सब्सिडी और ग्रासरूट लेवल पर काम करने वाली नीतियों का परिणाम है। वर्ल्ड बैंक की यह मान्यता मोदी सरकार के सामाजिक-आर्थिक विजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किए जाने का प्रतीक है।

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