April 21, 2026

भारत से बातचीत को फिर तैयार पाकिस्तान, शहबाज शरीफ बोले – कश्मीर, आतंकवाद और जल संकट जैसे मुद्दों पर समाधान के लिए जरूरी है संवाद

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत के साथ संवाद की वकालत करते हुए कहा है कि अगर दक्षिण एशिया में स्थायी शांति, स्थायित्व और विकास चाहिए, तो भारत और पाकिस्तान को कश्मीर, आतंकवाद और जल संकट जैसे जटिल मुद्दों पर खुले और गंभीर संवाद के माध्यम से समाधान निकालना होगा। अजरबैजान के लाचिन शहर में आयोजित पाकिस्तान-तुर्किये-अजरबैजान त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान, ईमानदारी और गंभीरता के साथ भारत से हर जरूरी मुद्दे पर बातचीत करने को तैयार है। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान चाहता है कि कश्मीर मुद्दे का हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और कश्मीर के लोगों की इच्छाओं के अनुसार किया जाए।

 

शरीफ ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अब भी इस क्षेत्र में शांति का पक्षधर है और यदि भारत भी आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर ईमानदारी से बात करना चाहता है, तो पाकिस्तान इसके लिए भी तैयार है। उन्होंने भारत की ओर से सिंधु जल संधि को आंशिक रूप से निलंबित किए जाने के निर्णय की कड़ी आलोचना की और इसे पाकिस्तान की जीवनरेखा बताया। उनका कहना था कि इस तरह के एकतरफा फैसले दोनों देशों के बीच भरोसे को और नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते बहाल करने की भी इच्छा जताई, ताकि दोनों देश आर्थिक रूप से लाभान्वित हो सकें।

 

यह दूसरी बार है जब शहबाज शरीफ ने एक ही सप्ताह में भारत से बातचीत की बात की है। इससे पहले सोमवार को उन्होंने तेहरान में भी भारत के साथ सभी विवाद सुलझाने के लिए बातचीत की इच्छा जाहिर की थी। शरीफ ने इस बात पर बल दिया कि संवाद ही एकमात्र रास्ता है जिससे दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे तनाव और विवाद खत्म हो सकते हैं।

 

अजरबैजान के लाचिन में आयोजित त्रिपक्षीय सम्मेलन में शरीफ के साथ तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव भी मौजूद थे। सम्मेलन के दौरान तीनों देशों ने क्षेत्रीय शांति, स्थायित्व और आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। शरीफ ने इस मौके पर काराबाख, कश्मीर और उत्तरी साइप्रस जैसे विवादित मुद्दों पर एक-दूसरे को समर्थन देने के लिए तुर्किये और अजरबैजान का आभार व्यक्त किया और कहा कि इन तीनों देशों की ताकत उनकी एकजुटता में निहित है।

 

भारत की ओर से फिलहाल शहबाज शरीफ की इस नई पेशकश पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि पाकिस्तान से कोई भी बातचीत केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) पर ही होगी। इसके अलावा, भारत ने बार-बार पाकिस्तान पर आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाया है और कहा है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक सामान्य बातचीत संभव नहीं है।

 

फिर भी विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति, वैश्विक मंचों पर अलग-थलग पड़ना, और क्षेत्रीय कूटनीतिक दबाव उसे भारत के साथ संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ने को मजबूर कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में भारत इस बातचीत की पेशकश को किस तरह से लेता है और क्या दक्षिण एशिया में दो प्रमुख देशों के रिश्तों में कोई नई शुरुआत हो सकती है या नहीं।

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