भारत की नर्स निमिषा प्रिया की खौफनाक कैद: सना जेल में जिंदगी और मौत के बीच उलझा एक संघर्ष
दुनिया की सबसे खतरनाक जेलों में से एक मानी जाने वाली यमन की सना जेल में बीते आठ सालों से भारत की नर्स निमिषा प्रिया बंद है। एक अनजान धरती, असहनीय माहौल और हर पल मौत की आशंका के बीच उसकी जिंदगी अब धीरे-धीरे एक सजा नहीं, बल्कि एक यातना बनती जा रही है। अब उसकी मां ने अमेरिकी न्यूज़ नेटवर्क सीएनएन से बात करते हुए एक बड़ा खुलासा किया है — “मेरी बेटी बहुत तनाव में है, उसे अब कोई उम्मीद नहीं बची है।”
कौन है निमिषा प्रिया और क्यों फंसी इस नरक में?
निमिषा प्रिया केरल की रहने वाली एक प्रशिक्षित नर्स हैं। वो 2017 से यमन की सना जेल में कैद हैं। उन पर एक यमनी नागरिक की हत्या का आरोप है। इसके बाद से ही उन्हें सना की उसी जेल में बंद कर दिया गया है जो यमन में हूती विद्रोहियों के कब्जे में है। ये वही विद्रोही हैं जो न सिर्फ अपने हिसाब से जेल चलाते हैं, बल्कि वहां कैदियों को इंसान नहीं, हथियार खरीदने का जरिया मानते हैं।
कैसी है सना जेल की दुनिया?
यमन की राजधानी में स्थित सना जेल की गिनती मध्य पूर्व की सबसे बड़ी और खतरनाक जेलों में होती है। इसकी शुरुआत 1991 में हुई थी और 1993 से इसमें कैदियों को रखा जाने लगा। इस जेल में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग वार्ड हैं, लेकिन सभी की हालत लगभग एक जैसी भयावह है। अमेरिकी शोधकर्ता केसी कूम्बस ने 2015 में इस जेल का दौरा किया था और बताया था कि यहां की दीवारें मजबूत तो हैं, लेकिन बम धमाकों की गूंज भीतर तक महसूस होती है।
निमिषा की हालत और उन्हें मिलने वाली सुविधाएं
निमिषा को महिला कैदियों के वार्ड में रखा गया है, जहां ज्यादातर महिलाएं या तो राजनीतिक बंदी हैं या फिर हूती विद्रोहियों द्वारा पकड़ी गईं सामाजिक कार्यकर्ता। वहां की स्थिति भयावह है। खाने और पीने के पानी के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं। जो कैदी पैसे नहीं दे सकते, उन्हें गंदा खाना और गंदा पानी दिया जाता है। कहा जाता है कि ये पैसे हूती विद्रोही अपने हथियारों की खरीद में लगाते हैं।
परिवार से संपर्क और आखिरी मुलाकात
निमिषा को हफ्ते में एक बार फोन पर बात करने की अनुमति दी जाती है। वो अपने परिवार से व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क करती हैं। 2023 में उन्होंने इसी माध्यम से केरल के कुछ मीडिया चैनलों को इंटरव्यू भी दिया था। 18 जून 2025 को उनकी मां ने आखिरी बार उनसे मुलाकात की थी। उस दौरान निमिषा ने कहा था कि उसे अब अपने देश लौटने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही।
अब आगे क्या?
भारत सरकार और केरल में उनकी रिहाई के लिए कई संगठन प्रयासरत हैं, लेकिन यमन के मौजूदा हालात और हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में जेल होने के चलते कोई सीधी राह नजर नहीं आ रही। निमिषा की मां ने अब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि “अगर जल्दी कुछ नहीं हुआ, तो मेरी बेटी की वापसी एक सपना बनकर रह जाएगी।”
निमिषा प्रिया की कहानी एक नर्स की नहीं, बल्कि उस इंसान की है जो मदद करने गई थी और खुद एक ऐसी सजा में फंस गई जिसे न कानून समझ रहा है, न इंसानियत।
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