April 30, 2026

रवींद्र जडेजा ने तोड़ा BCCI का बड़ा नियम, स्टेडियम पहुंचे अकेले; अब क्या होगी कार्रवाई?

भारत और इंग्लैंड के बीच एजबेस्टन टेस्ट मैच में जहां रवींद्र जडेजा ने बल्ले से 89 रनों की अहम पारी खेली, वहीं मैदान से इतर उन्होंने एक ऐसा कदम उठा लिया जिससे वे बीसीसीआई के निर्देशों की अवहेलना के आरोप में घिर गए हैं। दूसरे दिन का खेल शुरू होने से पहले जडेजा अकेले स्टेडियम पहुंच गए, जबकि बोर्ड के नए नियम के मुताबिक, खिलाड़ियों को विदेशी दौरों पर टीम बस से ही एक साथ यात्रा करनी होती है।

ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद लागू हुआ था नियम

बीसीसीआई ने साल 2025 की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद कुछ नए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनमें सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े अहम प्रावधान शामिल थे। इन नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया था कि कोई भी खिलाड़ी अकेले होटल से स्टेडियम नहीं जा सकता, सबको टीम बस में सामूहिक रूप से यात्रा करनी होगी।

जडेजा ने नियम तोड़ा, लेकिन टीम हित में

हालांकि, एजबेस्टन टेस्ट के दूसरे दिन जडेजा ने इस नियम को तोड़ा और टीम बस का इंतजार किए बिना खुद ही स्टेडियम रवाना हो गए। इस पर सवाल उठना लाज़िमी था, लेकिन जडेजा ने बाद में खुद इस पर सफाई दी और बताया कि उन्होंने यह कदम टीम के फायदे के लिए उठाया।

खुद दी सफाई, बताया क्यों तोड़ा नियम

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जडेजा ने कहा:
“गेंद नई थी और मुझे लगा कि मुझे अतिरिक्त बल्लेबाजी की जरूरत है। अगर मैं नई गेंद को अच्छे से खेल लेता, तो पारी को संभालना आसान हो जाता। यही सोचकर मैं जल्दी स्टेडियम चला गया ताकि एक्स्ट्रा ट्रेनिंग कर सकूं।”

उन्होंने आगे कहा कि टीम 5 विकेट गंवा चुकी थी और ऐसे में उनका योगदान अहम था, जिससे उन्हें संतुष्टि मिली।

अब क्या करेगी BCCI?

अब बड़ा सवाल ये है कि क्या बीसीसीआई जडेजा के इस नियम उल्लंघन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी? या फिर खिलाड़ी की मंशा को देखते हुए इसे नज़रअंदाज़ किया जाएगा? चूंकि उन्होंने टीम हित में यह फैसला लिया, ऐसे में कड़ी सजा की उम्मीद कम ही है।

हालांकि बोर्ड इस मामले को नजरअंदाज भी नहीं कर सकता क्योंकि इससे टीम के बाकी खिलाड़ियों के लिए गलत संदेश जा सकता है। संभावना यही जताई जा रही है कि जडेजा को आंतरिक रूप से चेतावनी देकर मामला शांत कर दिया जाएगा।

फिलहाल, जडेजा का मैदान पर प्रदर्शन और टीम के लिए प्रतिबद्धता उनकी सबसे बड़ी ढाल बनी हुई है। लेकिन यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि नियमों और प्रोफेशनलिज़्म के बीच संतुलन बनाए रखना कितना ज़रूरी है।

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