बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था ICU में! IMF से और ज़्यादा मदद की गुहार, जानिए पूरी कहानी

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पड़ोसी देश ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से वित्तीय सहायता की राशि में और इजाफा करने की अपील की है। इसे यूं समझिए कि जब देश की आर्थिक सेहत वेंटिलेटर पर हो, तो वैश्विक संस्थानों से “बचाव पैकेज” मांगना ही आखिरी रास्ता रह जाता है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश ने IMF से मौजूदा आर्थिक सहायता कार्यक्रम के तहत 762 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त मदद की गुज़ारिश की है। यदि यह मंजूरी मिलती है, तो IMF द्वारा दी जाने वाली कुल वित्तीय सहायता 4.1 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।

IMF के मुताबिक, बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था घरेलू राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक विद्रोहों से बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर देश की जीडीपी ग्रोथ पर पड़ा है। वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में बांग्लादेश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि (Year-on-Year) घटकर महज़ 3.3 प्रतिशत रह गई है, जो देश की सामान्य विकास दर के मुकाबले काफी कम है।

इस संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश सरकार और IMF के बीच कई स्तरों पर बातचीत हुई। परिणामस्वरूप, दोनों पक्षों के बीच विस्तारित ऋण सुविधा (ECF), विस्तारित निधि सुविधा (EFF) और लचीलापन और स्थिरता सुविधा (RSF) के तहत संयुक्त तीसरी और चौथी समीक्षा को पूरा करने के लिए जरूरी नीतियों पर एक कर्मचारी-स्तरीय (staff-level) समझौता किया गया है।

IMF अब इस अतिरिक्त सहायता पर अंतिम निर्णय लेगा, जिसके बाद इस आर्थिक राहत पैकेज को आधिकारिक रूप से मंजूरी मिल सकती है।

क्या है इसका असर?
बांग्लादेश की स्थिति दक्षिण एशिया के अन्य देशों के लिए एक चेतावनी की तरह देखी जा रही है। बढ़ती महंगाई, राजनीतिक अस्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी जैसे कारणों ने मिलकर देश को इस कगार पर ला खड़ा किया है। ऐसे में IMF की मदद एक अस्थायी राहत जरूर दे सकती है, लेकिन स्थायी सुधार के लिए बांग्लादेश को अपनी आर्थिक नीतियों में बुनियादी बदलाव लाना होगा।

अब सबकी निगाहें IMF के फैसले पर टिकी हैं – क्या यह मदद बांग्लादेश को आर्थिक मंदी से उबार पाएगी या फिर यह महज़ एक और “कर्ज का सहारा” साबित होगा?

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