May 1, 2026

बांग्लादेश में सियासी तूफान: मोहम्मद यूनुस और गुलाम सरवर राहत के बीच संबंधों पर मचा घमासान

बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस इन दिनों एक सियासी विवाद में घिरे हुए हैं। वह हाल ही में अपने साथ राहत को लेकर आयनाघर में घूमते नजर आए, जिसे लेकर बांग्लादेश में सियासी घमासान मच गया है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजिब वाजेद जॉय ने इस घटनाक्रम की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की, जिससे इस मुद्दे ने और तूल पकड़ ली।

इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि राहत कौन है और यूनुस किसके साथ घूम रहे हैं। गुलाम सरवर राहत एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन, जमात-मुजाहिदीन-बांग्लादेश (जेएमबी), का प्रमुख सदस्य है और वह पश्चिम बंगाल के खगरागढ़ विस्फोट मामले का मुख्य आरोपी है। राहत के साथ मोहम्मद यूनुस का संबंध बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में नया मोड़ ले रहा है, खासकर तब जब यूनुस ने सत्ता में आते ही उग्रवादी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा की थी।

गुलाम सरवर राहत: आतंकी गतिविधियों का मास्टरमाइंड

गुलाम सरवर राहत ने बांग्लादेश के अंदर कई आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया है। वह खगरागढ़ विस्फोट मामले का मास्टरमाइंड था और उसकी मदद से जेएमबी ने पूर्वी बर्दवान के कई इलाकों में आतंकी मॉड्यूल स्थापित किए थे। राहत पर कई गंभीर आरोप हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों की हत्या और आतंकवाद फैलाने का भी आरोप है। राहत को लेकर यह भी खुलासा हुआ कि वह एनआईए के द्वारा घोषित दस लाख रुपये के इनामी आतंकी साजिद उर्फ ​​मासूम मियां से भी जुड़ा हुआ है, जिसे कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था।

राहत के अलावा उसके साथी सलेहान और बोमा मिजान के भी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, सलेहान अभी भी फरार है, जबकि बोमा मिजान को गिरफ्तार कर लिया गया था।

मोहम्मद यूनुस का राजनीतिक बयान

अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने सत्ता में आते ही कई कट्टरपंथी उग्रवादी नेताओं को जेल से रिहा किया, जिनमें जेएमबी, एबीटी और हाट के प्रमुख नेता शामिल थे। इन नेताओं को पहले मौत और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद यूनुस ने यह घोषणा की कि उनकी सरकार किसी भी प्रकार की उग्रवादी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी और वह बांग्लादेश के राजनीतिक और सामाजिक सुरक्षा को हर हाल में बनाए रखेंगे।

लेकिन इस मुद्दे पर यूनुस की नीतियां विपक्षी दलों के लिए सवालिया निशान बन गईं, खासकर जब उन्होंने 13 फरवरी को आयनाघर का दौरा किया और गुलाम सरवर राहत से हसीना के कार्यकाल के दौरान हुए मानवाधिकार उल्लंघन और यातनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। राहत ने यूनुस को हसीना सरकार के दौरान किए गए ‘यातना’ और ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन’ की कई कथाएं सुनाईं, जो अब बांग्लादेश की राजनीति में एक और विवाद का कारण बन गई हैं।

बांग्लादेश में राजनीतिक संकट

गुलाम सरवर राहत का आयनाघर में मोहम्मद यूनुस के साथ दिखना बांग्लादेश की राजनीति में एक नई अशांति का संकेत दे रहा है। इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों को विरोध करने का एक और कारण दिया है। बांग्लादेश की सरकार और उसके विरोधियों के बीच यह मामला एक गंभीर सियासी संकट का रूप ले चुका है।

राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इन उग्रवादी नेताओं को रिहा करने के बाद उनके साथ सख्ती से निपटेगी या उनका साथ देने का आरोप लगाया जाएगा।

यह घटनाक्रम बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत दे रहा है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गंभीर हो सकता है।

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