बाबा रामदेव का सुझाव: योग और आयुर्वेद से बनाएं लिवर को मजबूत, बरसात में हेपेटाइटिस का ऐसे करें बचाव
बरसात के मौसम में जहां एक ओर नमी और उमस से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, वहीं वायरल हेपेटाइटिस का संक्रमण भी तेजी से फैलने लगता है। यह संक्रमण सीधा लिवर पर अटैक करता है और समय पर ध्यान न देने पर यह फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर तक का कारण बन सकता है। ऐसे में लिवर को कैसे सुरक्षित और मजबूत रखा जाए, इसके लिए योग गुरु बाबा रामदेव ने खास उपाय बताए हैं।
बाबा रामदेव के अनुसार, सुबह कुछ देर दंड बैठक (स्क्वैट्स) करके आप खुद के लिवर की स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। अगर 3-4 बैठक करने के बाद भी शरीर में थकान महसूस नहीं हो रही, तो समझिए लिवर स्वस्थ है। लेकिन अगर 8-10 बार उठने-बैठने में ही सांस फूलने लगे और थकान हावी हो जाए, तो यह लिवर की कमजोरी का संकेत हो सकता है। दरअसल, फिजिकल एक्टिविटी में जल्दी थक जाना लिवर की शुरुआती कमजोरी को दर्शाता है।
स्वामी रामदेव बताते हैं कि इस समय जलजमाव और गंदे पानी के कारण वायरल हेपेटाइटिस का खतरा काफी बढ़ गया है। ये वायरस लिवर के टिश्यूज को नुकसान पहुंचाते हैं और अगर इलाज में देरी हो जाए, तो यह समस्या गंभीर बीमारियों में तब्दील हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हर साल हेपेटाइटिस के करीब 20 लाख नए केस सामने आते हैं, जिनमें से 13 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं।
हेपेटाइटिस के पांच प्रकार होते हैं: A, B, C, D और E। इनमें A और E आमतौर पर दूषित भोजन या पानी से फैलते हैं, जबकि B, C और D संक्रमित खून से फैलते हैं। सबसे ज्यादा मौतें हेपेटाइटिस B के कारण होती हैं। इस खतरनाक बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाया जाता है।
बाबा रामदेव का मानना है कि अगर जीवन में योग और आयुर्वेद को अपनाया जाए, तो ना सिर्फ हेपेटाइटिस बल्कि किसी भी प्रकार का संक्रमण शरीर को प्रभावित नहीं कर पाएगा। नियमित योग, संतुलित आहार और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के सेवन से न सिर्फ लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी मजबूत किया जा सकता है।
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