एलुरु जिले के जंगारेड्डीगुडेम इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने ससुराल वालों और पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि उसे उसके जेठ के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा था, क्योंकि जेठ की शादी के आठ साल बाद भी उसकी कोई संतान नहीं थी।
आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में रहने वाली एक महिला ने अपने ससुराल वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उसका आरोप है कि उसका पति और ससुराल वाले उसे जेठ के साथ बच्चा पैदा करने के लिए शारीरिक संबंध बनाने पर मजबूर कर रहे थे। पीड़िता की शादी जंगारेड्डीगुडेम के रहने वाले रंजीत कुमार से हुई थी और उसका एक साल का बेटा भी है। वहीं, उसके पति के बड़े भाई प्रवीण की शादी को आठ साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें संतान नहीं हुई। इसी वजह से परिवार ने एक अमानवीय फैसला लिया और बहू को ही संतान पैदा करने का माध्यम बनाने की कोशिश की।
पीड़िता ने बताया कि जब उसने इस घटिया मांग का विरोध किया तो उसके ससुराल वालों ने उसे कमरे में बंद कर दिया और शारीरिक तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। महिला ने बताया कि यह उत्पीड़न लंबे समय से चल रहा था, लेकिन हालात तब बदतर हो गए जब उसने स्पष्ट रूप से जेठ के साथ किसी भी तरह का संबंध बनाने से इनकार कर दिया। पीड़िता ने किसी तरह घर से निकलकर पुलिस थाने पहुंचकर अपनी आपबीती बताई और शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी पति और अन्य परिजनों को हिरासत में लिया है। एलुरु पुलिस ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और मेडिकल जांच भी कराई जा रही है।
वहीं, स्थानीय महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह मामला न सिर्फ महिला उत्पीड़न का है, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। संगठनों ने मांग की है कि पीड़िता को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर, आरोपी ससुराल वालों ने सभी आरोपों को झूठा बताया है। उनका कहना है कि बहू ने झूठे आरोप लगाकर परिवार की छवि खराब करने की कोशिश की है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
एलुरु का यह मामला एक बार फिर समाज में व्याप्त कुप्रथाओं और महिलाओं के प्रति अमानवीय सोच को उजागर करता है। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था की चुनौती है, बल्कि सामाजिक मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है कि 21वीं सदी में भी ऐसी सोच कैसे जिंदा है, जहां एक महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता है।
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