वॉशिंगटन: ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर US का कड़ा एक्शन, भारत समेत 7 देशों की 32 कंपनियों और लोगों पर लगा प्रतिबंध
अमेरिका ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर शिकंजा कसते हुए बड़ा कदम उठाया है। वॉशिंगटन ने भारत समेत 7 देशों की 32 कंपनियों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिन पर ईरान के मिसाइल और UAV (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) कार्यक्रमों को सहयोग देने का आरोप है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह कदम ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा कि ये प्रतिबंध 27 सितंबर को ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के पुनः लागू किए गए प्रतिबंधों के समर्थन में हैं। अमेरिका ने भारत, चीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), तुर्की, हांगकांग, जर्मनी और यूक्रेन की कंपनियों और व्यक्तियों को इस सूची में शामिल किया है। इनमें भारत की Farmlane Private Limited का नाम भी शामिल है, जिस पर आरोप है कि उसने यूएई स्थित Marco Klinge कंपनी के साथ मिलकर सोडियम क्लोरेट और सोडियम पर्क्लोरेट जैसी रासायनिक सामग्री की खरीद में मदद की, जिनका उपयोग मिसाइल निर्माण में किया जा सकता है।
अमेरिकी वित्तीय खुफिया विभाग के उप सचिव जॉन के. हर्ले ने कहा कि ईरान वैश्विक वित्तीय तंत्र का दुरुपयोग कर अपने परमाणु और पारंपरिक हथियार कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी कार्रवाई का मकसद ईरान की वित्तीय पहुंच को सीमित करना और उसके आतंकवादी समूहों के समर्थन को रोकना है। हर्ले ने कहा, “हम राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करने के लिए अधिकतम दबाव डाल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करना चाहिए।”
अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम-2 के तहत की गई है, जो अमेरिकी एजेंसियों को निर्देश देता है कि वे ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, परमाणु हथियारों के विकास, और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की संपत्तियों पर रोक लगाएं। विदेश विभाग के मुताबिक, ईरान के सहयोगी नेटवर्क मध्य पूर्व और लाल सागर क्षेत्र में अमेरिकी तथा सहयोगी हितों के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं, इसलिए यह कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
अमेरिका ने कहा है कि वह आगे भी तीसरे देशों में मौजूद ईरानी सहयोगियों और कंपनियों पर कार्रवाई जारी रखेगा, ताकि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से पूरी तरह रोका जा सके। इस बीच भारत ने इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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