April 17, 2026

ट्रंप ने अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की बात कही

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। इस बार उनका निशाना बने हैं मशहूर अरबपति फाइनेंसर और परोपकारी संस्था चलाने वाले जॉर्ज सोरोस। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए सोरोस और उनके बेटे पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सोरोस और उनका बेटा अमेरिका में हिंसक प्रदर्शनों को बढ़ावा देते हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी को भारी रकम मुहैया कराते हैं। ट्रंप ने यहां तक कहा कि उनके खिलाफ RICO कानून (Racketeer Influenced and Corrupt Organizations Act) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।

 

भारत में भी जॉर्ज सोरोस को लेकर राजनीतिक विवाद लंबे समय से चलता रहा है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कई मौकों पर कांग्रेस पार्टी पर सोरोस से मिलीभगत के आरोप लगा चुकी है। भाजपा का दावा है कि सोरोस और उनकी संस्थाएं भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश करती रही हैं। अब ट्रंप द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने इसे और ज्यादा चर्चाओं में ला दिया है। यह वही सोरोस हैं जिनके खिलाफ भाजपा लगातार आवाज़ उठाती रही है और जिनके बारे में अब अमेरिकी राजनीति में भी विवाद गहराता जा रहा है।

 

सोरोस की संस्था ओपन सोसाइटी फाउंडेशन्स ने ट्रंप के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। संस्था का कहना है कि वह कभी भी किसी हिंसक आंदोलन को समर्थन नहीं देती। इसके बजाय उनकी फाउंडेशन मानवाधिकार, न्याय, पारदर्शिता, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में काम करती है। 95 वर्षीय सोरोस को दुनियाभर में एक बड़े परोपकारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थक के रूप में जाना जाता है। लेकिन ट्रंप और उनके समर्थक लंबे समय से उन्हें ‘कंजरवेटिव राजनीति का खलनायक’ मानते रहे हैं।

 

ट्रंप का हालिया बयान उनकी राजनीतिक रणनीति से भी जोड़ा जा रहा है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, वह इन दिनों लगातार अपने विरोधियों पर मुकदमे और धमकियों का सहारा ले रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के खिलाफ जांच की मांग की थी, जिसके बाद एफबीआई ने बोल्टन के घर पर छापा भी मारा। इसके अलावा, ट्रंप ने अपने पुराने साथी और अब आलोचक बने न्यू जर्सी के पूर्व गवर्नर क्रिस क्रिस्टी पर भी निशाना साधा और ब्रिजगेट मामले को दोबारा खोलने की बात कही।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप इस तरह की बयानबाजी और कानूनी दबाव डालकर राजनीतिक माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि यह कदम ताकतवर लोगों को जवाबदेह ठहराने का प्रयास है। वहीं, आलोचक इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और असहमति की आवाज़ पर हमला बताते हैं। अब देखना होगा कि ट्रंप की यह जंग जॉर्ज सोरोस के खिलाफ अमेरिका की राजनीति में कितना बड़ा मुद्दा बनती है।

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