May 1, 2026

अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की राह और 50% टैरिफ का असर

पूर्व विदेश सचिव और राज्यसभा सांसद हर्ष वर्धन श्रृंगला ने अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते रिश्तों पर भरोसा जताते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गहरी दोस्ती व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में अहम साबित हो सकती है। उन्होंने याद दिलाया कि “हाउडी मोदी” और “नमस्ते ट्रंप” जैसे बड़े आयोजनों के दौरान दोनों नेताओं ने आपसी रिश्तों को और मजबूत किया था। श्रृंगला के मुताबिक, यह रिश्ता केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

हालांकि, मौजूदा समय में व्यापारिक मोर्चे पर चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाले उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लागू कर दिया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल 86.5 अरब डॉलर के निर्यात में से लगभग 60.2 अरब डॉलर का सामान इस टैरिफ के दायरे में आ गया है। यानी आधे से ज्यादा भारतीय निर्यात पर सीधा असर पड़ने वाला है। इससे भारतीय उद्योगों और व्यापारिक वर्गों में चिंता की स्थिति बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैरिफ का सबसे ज्यादा प्रभाव टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, केमिकल्स और एग्रीकल्चरल उत्पादों पर पड़ेगा। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदारों में से एक है, ऐसे में भारी टैरिफ भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को कमजोर कर सकता है। निर्यातकों का कहना है कि इतनी ऊंची दर का शुल्क भारतीय सामान को अमेरिकी बाजार में महंगा बना देगा, जिससे मांग घटने की संभावना है।

फिर भी श्रृंगला का मानना है कि इस चुनौती को बातचीत और समझौते के जरिए दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच वर्षों से चले आ रहे गहरे संबंध इस जटिल स्थिति से निकलने में मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश जल्द ही ऐसा समझौता कर पाएंगे, जो न केवल टैरिफ की समस्या का समाधान करेगा बल्कि भविष्य के लिए व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा भी देगा।

भारत और अमेरिका के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। अब जबकि अमेरिका ने इतना बड़ा कदम उठाया है, दोनों देशों के बीच समझौते की राह पर दबाव और उम्मीद दोनों एक साथ बढ़ गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मोदी-ट्रंप की दोस्ती और राजनीतिक इच्छाशक्ति काम आई, तो यह समझौता न केवल मौजूदा व्यापारिक तनाव को खत्म करेगा, बल्कि भविष्य में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को और मजबूती देगा।

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