May 1, 2026

भारत ने आय समानता में अमेरिका-चीन को पीछे छोड़ा: विश्व बैंक रिपोर्ट में बड़ी छलांग

भारत ने आय समानता (Income Equality) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। विश्व बैंक की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया का चौथा सबसे समान देश बन गया है, जिसने अमेरिका, चीन और यूके जैसे शक्तिशाली देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का गिनी इंडेक्स स्कोर 2022-23 में 25.5 रहा, जो 2011-12 में 28.8 था। इस स्कोर से यह स्पष्ट होता है कि भारत में आय वितरण पहले की तुलना में कहीं अधिक संतुलित हुआ है। गिनी इंडेक्स जितना कम होता है, समाज में उतनी ही ज्यादा समानता होती है। तुलना करें तो चीन का स्कोर 35.7 और अमेरिका का 41.8 रहा।

भारत से आगे सिर्फ तीन देश हैं:

स्लोवाक रिपब्लिक (24.1)

स्लोवेनिया (24.3)

बेलारूस (24.4)

वहीं भारत ने अमेरिका, चीन और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों को इस पैमाने पर पीछे छोड़ दिया है।

रिपोर्ट में इस प्रगति का प्रमुख कारण अत्यधिक गरीबी में आई तेज गिरावट को बताया गया है।

2011-12 में 16.2% आबादी $2.15 प्रतिदिन से कम पर जीवन यापन कर रही थी।

2022-23 में यह घटकर केवल 2.3% रह गई।

कुल 171 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आए।

ग्रामीण गरीबी 18.4% से घटकर 2.8% और शहरी गरीबी 10.7% से घटकर 1.1% हो गई है। इससे यह साफ है कि गरीबी केवल कम नहीं हुई, बल्कि गांव-शहर के बीच का अंतर भी घटा है।

देश की 65% अत्यधिक गरीब जनसंख्या इन पांच राज्यों से थी:

उत्तर प्रदेश

बिहार

महाराष्ट्र

पश्चिम बंगाल

मध्य प्रदेश

इन राज्यों ने कुल गरीबी में कमी लाने में दो-तिहाई योगदान दिया। हालांकि अभी भी इन्हीं राज्यों में 54% गरीब आबादी रहती है।

गिनी इंडेक्स क्या है?

गिनी इंडेक्स किसी देश में आय वितरण की समानता को मापने का एक पैमाना है:

0 = पूर्ण समानता

100 = अधिकतम असमानता
भारत का स्कोर 25.5 है, जो “मध्यम रूप से कम असमानता” की श्रेणी में आता है।

सरकारी योजनाओं का असर

रिपोर्ट में भारत की प्रधानमंत्री जन धन योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, और स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाओं की सराहना की गई है, जिनकी मदद से गरीबों तक पैसे और सुविधाएं सीधे पहुंच पाईं।

अब भी मौजूद हैं ये चुनौतियां

सिर्फ 23% गैर-कृषि नौकरियां औपचारिक हैं

कृषि क्षेत्र में ज़्यादातर रोजगार अनौपचारिक हैं

महिला रोजगार दर सिर्फ 31%, पुरुषों की तुलना में 234 मिलियन महिलाएं कम वेतनभोगी काम में हैं

युवा बेरोजगारी 13.3%, उच्च शिक्षित युवाओं में यह दर 29% है

कितने लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले?

पिछले एक दशक में भारत में 378 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

गरीबी दर 61.8% से घटकर 28.1%

2022-23 में अत्यधिक गरीबी दर: 5.3% (न्यूनतम)

शहरी बेरोजगारी 2025 की पहली तिमाही में घटकर 6.6% रह गई – 2017-18 के बाद सबसे कम

 

भारत की यह उपलब्धि केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक विकास का भी संकेत है। हालांकि अभी कई सुधारों की जरूरत है, लेकिन पिछले दशक में भारत ने समानता की दिशा में जो प्रगति की है, वह वैश्विक स्तर पर एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

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