4 जुलाई को 3 अमेरिकी राष्ट्रपतियों की मौत—क्या सिर्फ संयोग या आज़ादी से जुड़ा कोई दिव्य रिश्ता?
4 जुलाई अमेरिका के इतिहास में केवल स्वतंत्रता दिवस नहीं है, बल्कि यह तारीख तीन ऐसे राष्ट्रपतियों के निधन की गवाह भी है जिन्होंने अमेरिका की आज़ादी की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई थी। थॉमस जेफरसन, जॉन एडम्स और जेम्स मुनरो—तीनों अमेरिकी राष्ट्रपति—इत्तेफाक से 4 जुलाई के दिन ही दुनिया से रुख़सत हुए।
50वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ पर एक साथ गए दो फाउंडिंग फादर
सबसे हैरान कर देने वाला संयोग 4 जुलाई 1826 को देखने को मिला, जब अमेरिका की आजादी की 50वीं वर्षगांठ पर उसके दो ‘फाउंडिंग फादर्स’—थॉमस जेफरसन और जॉन एडम्स—एक ही दिन चल बसे। थॉमस जेफरसन, जिन्होंने डेक्लरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस का मसौदा तैयार किया था, उस समय वर्जीनिया के अपने घर मॉन्टिसेलो में 83 वर्ष की उम्र में बीमार थे। वहीं जॉन एडम्स, जिन्होंने आज़ादी के आंदोलन में जोरदार भूमिका निभाई, मैसाचुसेट्स में 90 वर्ष की उम्र में जीवन के अंतिम दिनों से गुजर रहे थे।
इतिहासकारों के अनुसार, जेफरसन सुबह करीब 12:50 बजे और एडम्स शाम 6 बजे के आसपास इस दुनिया से विदा हुए। दिलचस्प बात यह है कि एडम्स को यह खबर नहीं थी कि जेफरसन उनसे पहले जा चुके हैं, और उनके आखिरी शब्द थे—“थॉमस जेफरसन अभी जीवित हैं।”
तीसरे राष्ट्रपति मुनरो का भी 4 जुलाई से गहरा नाता
इन दोनों के बाद, 4 जुलाई 1831 को अमेरिका के पांचवें राष्ट्रपति जेम्स मुनरो का भी निधन हुआ। मुनरो अमेरिका की विदेश नीति को परिभाषित करने वाले ‘मुनरो सिद्धांत’ के लिए प्रसिद्ध रहे। 73 वर्षीय मुनरो न्यूयॉर्क में अपनी बेटी के घर पर गंभीर बीमारी के चलते अंतिम सांसें ले रहे थे। उनकी मृत्यु ने 4 जुलाई को अमेरिका के लिए और भी अधिक ऐतिहासिक बना दिया।
राजनीतिक विरोध, फिर दोस्ती की बहाली
थॉमस जेफरसन और जॉन एडम्स के बीच एक समय तीखी राजनीतिक अदावत थी। दोनों की विचारधाराएं भिन्न थीं और चुनावी प्रतिस्पर्धा ने उन्हें अलग कर दिया था। लेकिन जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने चिट्ठियों के जरिए संवाद फिर से शुरू किया और पुराने मतभेद भुलाकर दोस्ती को नया जीवन दिया।
महज इत्तेफाक या नियति का संदेश?
इन तीन राष्ट्रपतियों का एक ही ऐतिहासिक तारीख को निधन होना केवल एक संयोग माना जाए या स्वतंत्रता के प्रतीकों का दिव्य जुड़ाव—यह सवाल आज भी अमेरिका के इतिहास में गूंजता है। लेकिन इतना तय है कि 4 जुलाई की तारीख, अमेरिका के लिए सिर्फ स्वतंत्रता का दिन नहीं, बल्कि बलिदान, नेतृत्व और ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक बन चुकी है।
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