April 20, 2026
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सोमवार, 16 मार्च 2026 को चैत्र कृष्ण द्वादशी और त्रयोदशी का संगम है। आज ‘सोम प्रदोष व्रत’ का विशेष अवसर है, जो भगवान शिव की कृपा पाने और मानसिक शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। आज चंद्रदेव मकर राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में रहेंगे, जिसके अधिपति देवता ‘अष्ट वसु’ हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव से आज आपकी मैनेजमेंट शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ेगा, जो जीवन के सही संचालन में सहायक होगा।

 

आज शिव योग का शुभ संयोग है, जो पुरानी बाधाओं को दूर कर बड़ी इच्छाएं पूरी करने के लिए उत्तम है। आज के दिन अपनी कला और संगीत के प्रति रुचि को निखारने का मौका मिलेगा। यदि जीवन में कोई तनाव महसूस हो, तो उसे केवल सुधार के संकेत के रूप में देखें और सहज रहें। महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दोपहर 12:06 से 12:54 बजे तक के अभिजीत मुहूर्त का उपयोग करें। सुबह राहुकाल के समय सावधानी बरतना ठीक रहेगा।

 

सूर्य और चंद्रमा की राशियां

सूर्य देव: मीन राशि में स्थित हैं

चन्द्र देव: मकर राशि में – सायं 06:14 बजे तक

 

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव धनिष्ठा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।

धनिष्ठा नक्षत्र: प्रातः 06:22 बजे तक (17 मार्च)

स्थान: 23°20’ मकर राशि से 6°40’ कुंभ राशि तक

नक्षत्र स्वामी: मंगलदेव

राशि स्वामी: शनिदेव

देवता: अष्ट वसु (भौतिक सुख-समृद्धि के देवता)

प्रतीक: ढोलक या बांसुरी

सामान्य विशेषताएं: मजबूत इच्छाशक्ति, आत्मविश्वासी, बाधाओं से लड़ने वाले, साहसी, धैर्यवान, मेहनती, अच्छी मैनेजमेंट शक्ति, प्रसिद्ध, सुंदर, धनवान, कला प्रेमी, संगीत के शौकीन और निडर।

आज सोम प्रदोष व्रत है

 

सोम प्रदोष व्रत 2026

प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 06:30 से रात 08:54 तक

अवधि: 02 घंटे 24 मिनट

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 16 मार्च, 2026 को सुबह 09:40 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त: 17 मार्च, 2026 को सुबह 09:23 बजे

 

प्रत्येक महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने का विधान है। जब यह तिथि सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है, तब महादेव की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष पुकारा जाता है, जिसे शिव जी की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम मार्ग माना गया है। यह उपवास न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि घर-परिवार में खुशहाली और वैवाहिक जीवन में मधुरता भी लाता है।

 

ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो चंद्रमा की स्थिति को अनुकूल बनाने और उससे संबंधित दोषों के निवारण के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावशाली है। सच्ची निष्ठा के साथ की गई पूजा से जीवन में आपसी तालमेल बढ़ता है। यह व्रत उन जातकों के लिए बहुत उपयोगी है जो मानसिक तनाव से उबरकर जीवन में स्थिरता चाहते हैं। भक्तजन बड़ी सहजता के साथ इस पावन दिन पर शिव भक्ति में लीन रहते हैं।

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