सपा नेता आजम खान से पूछताछ के लिए ईडी मांगेगी रिमांड: वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों को लेकर होंगे सवाल

लखनऊ। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ और कद्दावर नेता आजम खान की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने जांच का अगला चरण शुरू करने की तैयारी कर ली है। एजेंसी जल्द ही विशेष अदालत में रिमांड अर्जी दाखिल कर आजम खां को अपनी हिरासत में लेने की मांग कर सकती है। रिमांड मिलने के बाद ईडी उनसे आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। इस दौरान जांच एजेंसी का मुख्य फोकस 426.46 करोड़ रुपये की उन संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन पर रहेगा, जिन्हें जौहर ट्रस्ट और आजम खां से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। ईडी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित तौर पर धन कहां से आया, किन माध्यमों से उसका लेन-देन हुआ और इस पूरी प्रक्रिया में किन लोगों को लाभ पहुंचा।

31 अक्टूबर को हुई गिरफ्तारी, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आजम खां

प्रवर्तन निदेशालय ने आजम खां को 31 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद रविवार को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे पहले 13 अक्टूबर को जांच एजेंसी ने रामपुर जेल में आजम खां से पूछताछ की थी। इस पूछताछ के बाद मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत नई एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। अब गिरफ्तारी के बाद ईडी पूछताछ के जरिए जांच में सामने आए वित्तीय तथ्यों और दस्तावेजों का मिलान करना चाहती है। माना जा रहा है कि रिमांड के दौरान एजेंसी उन लेन-देन से जुड़े सवाल पूछेगी, जिनकी कड़ियां जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़ती हैं।

जौहर ट्रस्ट के जरिए धन के इस्तेमाल की जांच, सरकारी कार्यों के लिए निर्धारित संसाधनों पर भी सवाल

पूरे मामले की जांच का केंद्र जौहर ट्रस्ट और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन हैं। ईडी का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि और सामग्री का इस्तेमाल जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण एवं अन्य गतिविधियों में किया गया। इसके अलावा सरकारी ठेके हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों से कथित तौर पर ट्रस्ट तक धन पहुंचने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठेकेदारों से ट्रस्ट तक पैसा किस माध्यम से पहुंचा, उसका वास्तविक स्रोत क्या था और संबंधित वित्तीय लेन-देन में किन लोगों की भूमिका रही। ईडी इन सभी कड़ियों को जोड़कर यह समझने की कोशिश कर रही है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं से किसे लाभ मिला और संपत्तियां किस तरह अर्जित की गईं।

2019 में दर्ज 26 एफआईआर से शुरू हुई थी जांच, किसानों की जमीन पर कब्जे के भी आरोप

ईडी ने इस मामले में वर्ष 2019 में रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इन एफआईआर में किसानों की जमीन जौहर विश्वविद्यालय के लिए जबरन कब्जाने, धमकी देकर बैनामा कराने और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। इन मामलों से जुड़े तथ्यों और वित्तीय गतिविधियों की जांच आगे बढ़ने के साथ ईडी ने जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से संबंधित संपत्तियों को भी अपने जांच के दायरे में लिया। अगस्त 2026 में एजेंसी ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए थे, जिनकी जांच के आधार पर वित्तीय लेन-देन की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।

वहीं अब ईडी की कोशिश है कि आजम खां से पूछताछ कर संपत्तियों के स्वामित्व, धन के स्रोत, बैंकिंग लेन-देन और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों के बारे में जानकारी हासिल की जाए। रिमांड के दौरान एजेंसी जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर सवाल कर सकती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि पूछताछ से जांच एजेंसी को वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों से जुड़े मामले में कौन-कौन सी नई जानकारियां मिलती हैं।

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