शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी और महानवमी: 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी विजयादशमी, कन्या पूजन क्यों है खास ?

लखनऊ। शारदीय नवरात्रि का आज नौवां दिन है। इस पावन अवसर पर सोमवार, 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों तिथियों की पूजा-अर्चना की जा रही है। तिथियों के विशेष संयोग के चलते इस बार एक ही दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी और नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आराधना का अवसर मिल रहा है। नवरात्रि के इन अंतिम दिनों में भक्त मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। इस अवसर पर कई घरों और मंदिरों में कन्या पूजन भी किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन के बाद हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ नवरात्रि की पूजा संपन्न की जाती है। इसके अगले दिन, मंगलवार 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाएगा।

महाअष्टमी और महानवमी की तिथि व समय

पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर हुई थी, जबकि इसका समापन 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि की मान्यता के आधार पर महाअष्टमी की पूजा 19 अक्टूबर, सोमवार को की जा रही है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। वहीं, नवमी तिथि का प्रारंभ 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगा और इसका समापन 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर होगा। ऐसे में सोमवार को ही महानवमी की पूजा और इससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठान भी किए जा रहे हैं। अष्टमी और नवमी तिथि के इस संयोग के कारण श्रद्धालुओं के लिए पूजा और कन्या पूजन का समय निर्धारित करना महत्वपूर्ण है।

मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व

नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी शांति, पवित्रता और सुख-समृद्धि की प्रतीक हैं। भक्त इस दिन मां की पूजा-अर्चना कर परिवार में सुख-शांति और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं। वहीं, महानवमी के दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें सिद्धियां प्रदान करती हैं। महानवमी पर पूजा के साथ हवन करने की परंपरा भी प्रचलित है। कई परिवारों में हवन के बाद कन्या पूजन कर नवरात्रि के व्रत का पारण किया जाता है। हालांकि, पूजा-पाठ और व्रत के समापन की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

कन्या पूजन क्यों है खास ?

नवरात्रि में कन्या पूजन को शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं में देवी का स्वरूप देखा जाता है और उनकी पूजा करके मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है। परंपरा के अनुसार, अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं को आमंत्रित कर उनका पूजन किया जाता है। कई स्थानों पर कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराया जाता है, जिसे भैरव या लांगुरिया का स्वरूप माना जाता है। कन्या पूजन के माध्यम से श्रद्धालु देवी शक्ति के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं। इस दिन कन्याओं को भोजन कराने, दक्षिणा देने और उपहार भेंट करने की परंपरा है। हालांकि, कन्या पूजन की विधि और उससे जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं।

कन्या पूजन की विधि: ऐसे करें पूजा-अर्चना

कन्या पूजन के लिए सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल को व्यवस्थित करें और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करें। इसके बाद कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर स्वच्छ स्थान पर बैठाएं। परंपरा के अनुसार, उनके पैर धोकर तिलक लगाया जाता है और पुष्प अर्पित कर उनका स्वागत किया जाता है। मां दुर्गा को भोग लगाने के बाद कन्याओं को हलवा, पूरी, चना और अन्य सात्विक पकवान श्रद्धापूर्वक परोसे जाते हैं। भोजन कराने के बाद कन्याओं को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, फल या उपहार दिए जाते हैं। यदि परिवार की परंपरा में बालक को शामिल किया जाता है, तो उसे भी सम्मानपूर्वक भोजन कराया जाता है। अंत में कन्याओं का आशीर्वाद लेकर उन्हें प्रसन्नतापूर्वक विदा किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्या पूजन में श्रद्धा के साथ-साथ कन्याओं का सम्मान, उनकी सुविधा और उनके प्रति स्नेहपूर्ण व्यवहार भी विशेष महत्व रखता है।

20 अक्टूबर को मनाई जाएगी विजयादशमी

शारदीय नवरात्रि के समापन के बाद 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के बाद विजयादशमी के दिन देशभर में विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। इस प्रकार महाअष्टमी, महानवमी, हवन और कन्या पूजन के साथ भक्त नवरात्रि के अंतिम चरण में मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं और विजयादशमी की तैयारियों में जुटे हैं।

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