April 17, 2026

दुनिया | डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को परमाणु समझौते पर सख्त चेतावनी, अप्रैल में चीन दौरे का ऐलान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को परमाणु समझौते को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान परमाणु डील पर सहमत नहीं होता है तो उसके लिए हालात बेहद “दर्दनाक” हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका टकराव नहीं चाहता और समझौते के जरिए तनाव कम करना चाहता है, लेकिन यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही तनाव बना हुआ है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान है, ताकि किसी बड़े संघर्ष से बचा जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि समझौते के बिना हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं, इसलिए ईरान को बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताता रहा है और इस मुद्दे पर लगातार दबाव बनाए हुए है। ट्रंप के हालिया बयान से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन एक ओर सख्त रुख अपनाए हुए है, तो दूसरी ओर बातचीत के विकल्प को भी खुला रखना चाहता है।

इस बीच ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपनी हालिया बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इजराइल के प्रधानमंत्री के साथ उनकी बातचीत काफी सकारात्मक और उपयोगी रही, जिसमें ईरान, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। अमेरिका और इजराइल के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत बताते हुए ट्रंप ने कहा कि दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को लेकर मिलकर काम कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के तहत चीन के साथ संबंधों को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने घोषणा की कि वह अप्रैल में चीन की यात्रा कर शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। ट्रंप ने कहा कि इस समय अमेरिका और चीन के रिश्ते अच्छे हैं और वह उन्हें और मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शी जिनपिंग इस वर्ष अमेरिका का दौरा करने वाले हैं, जिससे दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद जारी रहेगा।

ट्रंप के अनुसार अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर लगातार बातचीत चल रही है। उनके बयान से स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका एक ओर ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति अपना रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ संबंधों को स्थिर और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इस संतुलन में अमेरिका सख्त चेतावनी और कूटनीतिक संवाद—दोनों रास्तों पर एक साथ आगे बढ़ता नजर आ रहा है।

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