बिजनेस | IT स्टॉक्स में भारी गिरावट से शेयर बाजार में ‘ब्लैक फ्राइडे’, 2 दिन में निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये डूबे
ग्लोबल बाजारों में तेज बिकवाली का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया, जहां आईटी सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट ने पूरे बाजार को हिला कर रख दिया। शुक्रवार को बाजार के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ खुले और दिनभर दबाव में कारोबार करते रहे। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 700 अंक तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। लगातार दूसरे दिन बाजार में गिरावट के कारण निवेशकों को भारी नुकसान हुआ और बीते दो दिनों में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बाजार से साफ हो गई।
बाजार में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण आईटी सेक्टर के शेयरों में वैश्विक स्तर पर आई कमजोरी रही। भारतीय बाजार में आईटी कंपनियों के शेयर करीब 5 फीसदी तक गिर गए, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया। बुधवार को बाजार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ था, तब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का कुल मार्केट कैप करीब 474 लाख करोड़ रुपये था, जो गिरकर अब लगभग 465 लाख करोड़ रुपये रह गया है। गुरुवार को भी सभी सेक्टरों में प्रॉफिट बुकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था और यह दबाव शुक्रवार को भी जारी रहा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर तकनीकी शेयरों में बिकवाली का असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, बाजार फिलहाल उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में गिरावट की आशंका पहले से थी, लेकिन इसकी तीव्रता और समय को लेकर स्पष्टता नहीं थी। संयुक्त राज्य अमेरिका के टेक-हैवी इंडेक्स में आई गिरावट का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा है और इसका दबाव भारतीय आईटी कंपनियों पर भी देखने को मिल रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय घबराहट में आईटी शेयरों की बिक्री करना निवेशकों के लिए सही रणनीति नहीं हो सकती और उन्हें बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए।
बाजार में गिरावट की एक और बड़ी वजह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी है। पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को परमाणु समझौते को लेकर दी गई चेतावनी और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की आशंका ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इस तरह की अनिश्चितता का असर आमतौर पर शेयर बाजार पर नकारात्मक पड़ता है और निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं।
इसके अलावा मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और कमजोर होता भारतीय रुपया भी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जा रहा है। डॉलर लगातार तीसरे सत्र में मजबूत होकर 96.93 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि रुपया गिरकर 90.67 प्रति डॉलर पर खुला। मजबूत डॉलर की स्थिति में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर सुरक्षित परिसंपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं, जिससे भारतीय शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनता है। कुल मिलाकर आईटी शेयरों में बिकवाली, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रा बाजार के उतार-चढ़ाव जैसे कई कारकों ने मिलकर बाजार में भारी गिरावट का माहौल बनाया है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
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