May 1, 2026

दिल्ली: पश्चिम बंगाल में BLOs को मिल रही धमकियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI ने कहा– सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में बूथ-लेवल अधिकारियों (BLOs) को मिल रही धमकियों पर गंभीर चिंता जताई है। एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि जमीनी स्तर पर BLOs की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है और इस मुद्दे को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर उसके पक्ष पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही CJI ने यह भी कहा कि BLOs से जुड़े निर्देश पूरे देश में लागू होंगे और यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है।

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि BLOs की सुरक्षा अभी राज्य पुलिस पर निर्भर है, लेकिन जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों की तैनाती भी की जा सकती है। ECI ने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी को खतरे का अंदेशा हो, तो वह राज्य चुनाव आयोग और जिला निर्वाचन अधिकारी से सीधी सुरक्षा मांग सकता है। मतदाता नामांकन और नागरिकता से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी कड़ी टिप्पणी की। CJI ने कहा कि “हम कानून किसी को हाथ में लेने की इजाज़त नहीं दे सकते।” उन्होंने यह बात तब कही जब ECI ने दावा किया कि स्थानीय पुलिस पर पूरा नियंत्रण आने तक हालात में बदलाव मुश्किल है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि BLOs को सुरक्षा देने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं। लेकिन जस्टिस बागची ने रिकॉर्ड में केवल एक FIR का उदाहरण होने पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या एक मामले के आधार पर पूरे राज्य की कानून व्यवस्था पर संदेह किया जा सकता है।

जस्टिस बागची ने कहा कि अगर राज्य पुलिस पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पा रही है, तो ECI को राज्य सरकार से और बलों की मांग करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट को यह देखना होगा कि यह मामला वास्तविक खतरे पर आधारित है या केवल चिंता का एक पक्ष रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ECI से ठोस जवाब मांगने के लिए याचिकाकर्ता को prima facie मजबूत आधार दिखाना होगा।

अंत में CJI सूर्यकांत ने आदेश दिया कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार दोनों को नोटिस जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि कोर्ट यह जानना चाहेगा कि आयोग और केंद्र इस मुद्दे पर क्या कदम उठाने की योजना बना रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती स्पष्ट करती है कि BLOs की सुरक्षा को लेकर अब गंभीर और संरचनात्मक समाधान की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!