लोकसभा में चुनाव सुधार बहस के दौरान राहुल गांधी का RSS पर हमला, स्पीकर ने लगाई लगाम
समानता, संविधान और बयानबाज़ी को लेकर संसद में जमकर हंगामा
लोकसभा में चुनाव सुधार पर आयोजित विशेष चर्चा उस समय गर्मा गई, जब कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का जिक्र कर दिया। राहुल गांधी ने कहा कि “समानता की भावना से RSS को दिक्कत है, और यही वजह है कि संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा किया जा रहा है।” उनके इस बयान पर सदन में हंगामा मच गया और स्पीकर ओम बिरला ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह विषय चुनाव सुधार से जुड़ा नहीं है। स्पीकर ने राहुल को रोकते हुए साफ कहा—“LOP का मतलब ये नहीं कि कुछ भी बोलें, कृपया विषय पर ही चर्चा करें।”
राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत खादी और भारतीय परंपरा से की। उन्होंने कहा कि भारत एक “फैब्रिक” की तरह है, जहां हर धागा महत्वपूर्ण होता है और हर नागरिक उस धागे का हिस्सा है। राहुल ने कहा कि देश की विविधता ही भारत की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि देश की वेशभूषा में भी यही विविधता दिखती है और देश का हर नागरिक समान महत्व रखता है।
हालांकि, जैसे ही राहुल ने RSS का नाम लिया और संवैधानिक संस्थाओं पर कथित ‘कब्जे’ का आरोप लगाया, सत्तापक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। स्पीकर ने उन्हें नियमों का पालन करने की नसीहत देते हुए कहा कि यह चर्चा केवल चुनाव सुधार पर केंद्रित है, न कि राजनीतिक आरोपों पर। स्पीकर के टोकने के बाद भी विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक जारी रही, जिसके चलते सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी बहस में शामिल हुए और कहा कि सरकार चुनाव सुधार पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विषय से भटक रहे हैं और गैर-ज़रूरी मुद्दे उठा रहे हैं। रिजिजू ने कहा कि “हमने पूरा समय निकालकर चर्चा के लिए बैठा है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष असल मुद्दे पर बात ही नहीं कर रहे।” इस पर विपक्षी सांसदों ने भी पलटवार किया और कहा कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं पर सवालों से बच रही है।
सदन में उठा यह विवाद धीरे-धीरे और बढ़ता गया, जिससे चर्चा कई बार बाधित हुई। राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य में इस बात पर जोर दिया कि चुनाव सुधार का असली मकसद तभी पूरा होगा, जब सभी संस्थाएं निष्पक्ष और स्वतंत्र हों। हालांकि सत्तापक्ष ने इसे राजनीतिक हमला बताया और कहा कि विपक्ष सुधारों की दिशा में रचनात्मक सहयोग देने के बजाय बहस को भटका रहा है।
करीब एक घंटे चली इस तीखी नोकझोंक के बाद भी सदन में माहौल शांत नहीं हो पाया। स्पीकर को कई बार सांसदों को शांत रहने और विषय पर लौटने की अपील करनी पड़ी। कुल मिलाकर, चुनाव सुधार पर विशेष चर्चा का बड़ा हिस्सा RSS और राहुल गांधी के आरोपों पर ही केंद्रित रहा, जबकि असल सुधारों पर बहस कम होती दिखी।
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