पाकिस्तान में सुबह-सुबह कांपी धरती, 5.2 तीव्रता का आया भूकंप
पाकिस्तान के उत्तरी हिस्सों में शुक्रवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। रिक्टर पैमाने पर 5.2 तीव्रता वाले इस भूकंप ने कई इलाकों में लोगों को नींद से जगाकर घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। स्थानीय समयानुसार करीब 2:39 बजे झटके महसूस हुए, जबकि भारतीय समय के मुताबिक यह 3:09 बजे दर्ज किया गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने बताया कि भूकंप का स्रोत जमीन से लगभग 135 किलोमीटर नीचे था, जिसकी वजह से सतह पर नुकसान सीमित रहने की संभावना जताई गई है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी प्रकार के जान-माल की हानि की जानकारी सामने नहीं आई है।
भूकंप का केंद्र पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास पहाड़ी क्षेत्र बताया गया है। यह इलाका अक्सर भूकंपीय गतिविधियों की चपेट में रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, गहराई में आने वाले भूकंप सतह तक पहुंचते-पहुंचते अपनी अधिक ऊर्जा खो देते हैं, जिसकी वजह से जमीन पर झटकों की तीव्रता कम हो जाती है। इसी कारण इस भूकंप का प्रभाव सीमित रहा। हालांकि उत्तर पाकिस्तान के कई इलाकों में लोग डरे हुए बाहर निकल आए और कुछ देर तक खुले स्थानों में ही खड़े रहे। क्षेत्रीय प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
पाकिस्तान भौगोलिक रूप से दुनिया की सबसे सक्रिय भूकंपीय पट्टियों में से एक पर स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टॉनिक प्लेटों की टक्कर लगातार होती रहती है। इसी कारण देश के कई राज्यों—खैबर पख्तूनख्वा, गिलगित-बाल्तिस्तान और बलूचिस्तान—में भूकंप आना आम बात है। बलूचिस्तान तो देश के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है, जहां इतिहास में कई बार विनाशकारी झटके दर्ज किए जा चुके हैं। जबकि पंजाब और सिंध जैसे राज्य भी भूगर्भीय गतिविधियों के जोखिम से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं।
पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पाकिस्तान लगातार मध्यम तीव्रता के भूकंप झेलता आ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 29 जून को 5.5 तीव्रता का भूकंप आया था, जबकि 10 मई को 5.7 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। इसके अलावा 12 अप्रैल को 5.0 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया, और कराची में मार्च व जून के दौरान कई हल्के झटके आए। इस ताजा झटके के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान को अपनी आपदा तैयारी प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से भूकंपीय जोखिम का केंद्र रहा है।
पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्रों में आया यह भूकंप एक बार फिर यह याद दिलाता है कि यह इलाका भूगर्भीय दृष्टि से कितना संवेदनशील है। अधिकारियों ने कहा है कि खतरा अभी टला नहीं है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है। हालांकि इस बार किसी नुकसान की खबर नहीं है, मगर बार-बार आने वाली ऐसी घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं और संकेत देती हैं कि भविष्य के लिए मजबूत सुरक्षा और तैयारी बेहद जरूरी है।
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