May 1, 2026

सऊदी क्राउन प्रिंस और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर भड़की जमाल खशोगी की विधवा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की हाल ही में हुई मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से 2018 की उस दर्दनाक घटना को चर्चा में ला दिया है, जब पत्रकार जमाल खशोगी की इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में हत्या कर दी गई थी। इस मुलाकात पर खशोगी की विधवा हनान इलातर खशोगी ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य उनके लिए बेहद पीड़ादायक था और उन्हें उम्मीद थी कि इतने वर्षों बाद भी न्याय की दिशा में कोई ठोस कदम उठता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हनान का कहना है कि क्राउन प्रिंस और ट्रंप की यह मुलाकात उनके लिए निराशा से भरा पल थी।

 

हनान इलातर ने बताया कि जमाल खशोगी एक ईमानदार, साहसी और पेशेवर पत्रकार थे, जो सऊदी शासन की नीतियों पर बेबाकी से लिखते थे। उन्होंने ट्रंप द्वारा खशोगी को “अत्यंत विवादित” बताया जाने के बयान को गलत बताते हुए कहा कि जमाल ने हमेशा पत्रकारिता के उच्चतम नैतिक मानकों का पालन किया। यह मुलाकात इसलिए भी चुभी क्योंकि 2018 में हुई हत्या के बाद यह सऊदी क्राउन प्रिंस की व्हाइट हाउस की पहली यात्रा थी। खुफिया रिपोर्टों में इस हत्या के आदेश को लेकर क्राउन प्रिंस की भूमिका पर सवाल उठ चुके हैं, हालांकि ट्रंप लगातार यह कहते आए हैं कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।

 

हनान इलातर ने यह खुलासा भी किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ट्रंप को पत्र लिखा था और अनुरोध किया था कि वे सऊदी प्रशासन पर दबाव डालकर उन्हें न्याय दिलाने में मदद करें। लेकिन उन्हें किसी तरह का जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि जब एबीसी न्यूज के पत्रकार ने क्राउन प्रिंस से खशोगी की हत्या पर सवाल किया और ट्रंप ने उसे डांटा, तो वे इस प्रतिक्रिया से गहराई से आहत हुईं। उनके अनुसार, यह व्यवहार पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

 

खशोगी की विधवा की सबसे बड़ी मांग अपने पति के अवशेष को प्राप्त करने की है, ताकि वह उन्हें सम्मानपूर्वक दफन कर सकें। साथ ही वह हत्या के लिए आधिकारिक माफी और उचित वित्तीय मुआवजे की भी मांग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक राष्ट्र होने के नाते अमेरिका को उन्हें न्याय दिलाने के लिए आगे आना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों ने उन्हें बेहद निराश किया है। हालांकि सऊदी प्रशासन ने उनके दावों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि विवाह का पंजीकरण आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं था।

 

हत्या के समय जमाल खशोगी अपनी तुर्की मंगेतर के साथ विवाह संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास गए थे। वहीं उनके साथ हुई बर्बरता ने विश्वभर में मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर दी थी। अब क्राउन प्रिंस और ट्रंप की मुलाकात के बाद खशोगी की विधवा की पीड़ा और गुस्सा एक बार फिर सामने आया है, जो न्याय की मांग को और मजबूत करता है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!