अमेरिका: ट्रंप के वीडियो विवाद पर BBC की माफी, मानहानि के आरोप खारिज

अमेरिका: ट्रंप के वीडियो विवाद पर BBC ने मांगी माफी, मानहानि के आरोपों को बताया बेबुनियाद
चार साल पुराने भाषण को एडिट करने पर विवाद, ट्रंप बोले– छवि को पहुंचा नुकसान; BBC ने गलती मानी पर पक्षपात से किया इनकार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और BBC के बीच चार साल पुराने एक वीडियो को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। ट्रंप ने BBC पर अपने भाषण को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया था और 1 अरब डॉलर (करीब ₹8,400 करोड़) का मुकदमा करने की धमकी दी थी। ट्रंप की कानूनी टीम ने BBC को नोटिस भेजा था, जिसमें कहा गया था कि इस वीडियो एडिटिंग ने राष्ट्रपति की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया है। इस बीच BBC ने एडिटिंग में हुई गलती स्वीकार करते हुए ट्रंप से माफी मांग ली है, हालांकि संस्था ने मानहानि के दावे को पूरी तरह निराधार बताया है।

BBC चेयरमैन समीर शाह ने व्हाइट हाउस को भेजे गए पत्र में कहा कि ट्रंप के भाषण का संपादित संस्करण भ्रामक था और एडिटिंग में त्रुटि हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गलती किसी भी तरह की साजिश या राजनीतिक मंशा के तहत नहीं की गई थी। BBC ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी वक्तव्य को तोड़ना-मरोड़ना नहीं था, लेकिन अंतिम वीडियो में संदर्भ बदलने जैसी स्थिति बन गई, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। संस्थान ने यह भी जोड़ा कि इस गलती को तुरंत सुधार लिया गया है और संबंधित टीम पर कार्रवाई भी की गई है।

विवाद की शुरुआत उस वीडियो से हुई थी जिसे BBC ने एक रिपोर्ट में इस्तेमाल किया था। यह वीडियो उस समय का था जब अमेरिकी कांग्रेस राष्ट्रपति चुनाव 2020 में जो बाइडेन की जीत की पुष्टि करने वाली थी। ट्रंप ने उस वक्त अपने समर्थकों से कहा था कि वे “शांति और देशभक्ति के साथ अपनी आवाज उठाएं”। बाद में उन्होंने एक और टिप्पणी की थी– “अगर तुम लड़ाई नहीं करोगे तो तुम्हारा देश नहीं बचेगा।” BBC पर आरोप है कि उसने इस भाषण के हिस्सों को अलग-अलग काटकर अपने कार्यक्रम में जोड़ा, जिससे एक अलग अर्थ निकलता दिखाई दिया। ट्रंप का कहना था कि वीडियो एडिटिंग का उद्देश्य उन्हें हिंसा भड़काने वाला दिखाना था।

ट्रंप की प्रतिक्रिया सामने आते ही यह विवाद तेजी से बढ़ गया। उनके समर्थकों ने BBC पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया और इसे “फेक न्यूज” बताया। ट्रंप ने भी कहा कि वीडियो एडिटिंग के कारण उनकी छवि को गहरा नुकसान हुआ है। उनका कहना था कि यह सिर्फ एक पत्रकारिता की गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है। ट्रंप के आरोपों के बाद BBC के भीतर भी हलचल मच गई और कुछ कर्मचारियों ने इस विवाद के कारण इस्तीफे दे दिए।

BBC ने अब सफाई देते हुए कहा है कि मानहानि का दावा सही नहीं है, क्योंकि संस्था ने कभी ट्रंप की मंशा या व्यक्तित्व को गलत तरीके से पेश करने का इरादा नहीं रखा। BBC ने कहा कि एडिटिंग की तकनीकी गलती और राजनीतिक पक्षपात के आरोप दो बिल्कुल अलग बातें हैं। जहां गलती स्वीकार की गई है, वहीं BBC का कहना है कि कानूनी रूप से यह मानहानि के दायरे में नहीं आता। फिलहाल ट्रंप 1 अरब डॉलर के मुकदमे की धमकी पर अड़े हुए हैं, लेकिन BBC का मानना है कि यह मामला कानूनी रूप से टिक नहीं पाएगा।

इस विवाद ने एक बार फिर मीडिया की जिम्मेदारी, राजनीतिक बयानों की रिपोर्टिंग और डिजिटल एडिटिंग की पारदर्शिता जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी या राजनीतिक संवेदनशीलता वाले वक्तव्यों को रिपोर्ट करते समय विशेष सावधानी बरतना जरूरी है ताकि किसी भी पक्ष को नुकसान न पहुंचे। ट्रंप और BBC के बीच चल रहा यह टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है, खासकर तब जब ट्रंप 2028 के चुनावों से पहले अपने राजनीतिक अभियान को मजबूत कर रहे हैं।

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