May 4, 2026

महाराष्ट्र के सांगली जिले के इस्लामपुर का नाम अब ‘ईश्वरपुर’ हुआ, गृह मंत्रालय और सर्वे ऑफ इंडिया से मंजूरी

महाराष्ट्र के सांगली जिले के इस्लामपुर शहर का नाम अब आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘ईश्वरपुर’ कर दिया गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय और भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) ने इस परिवर्तन को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। लंबे समय से चल रही इस प्रक्रिया को अब औपचारिक स्वीकृति मिल गई है, जिससे सांगली जिले में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्णय शहर की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने वाला कदम है।

 

इस्लामपुर नगर परिषद ने 4 जून 2025 को संकल्प संख्या 825 पारित करते हुए शहर का नाम बदलने का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव को न केवल नगर परिषद ने सर्वसम्मति से पास किया, बल्कि इसे सांगली के वरिष्ठ डाकघर अधीक्षक और मध्य रेलवे मिराज के सहायक मंडल अभियंता ने भी अपनी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देकर समर्थन दिया था। इसके बाद प्रस्ताव भारत सरकार के गृह मंत्रालय के पास भेजा गया, जिसने 13 अगस्त 2025 को पत्र जारी कर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को मंजूरी दी।

 

भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने इस प्रस्ताव की जांच, स्थल सत्यापन और सभी तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करने के बाद इसे स्वीकृति प्रदान की। विभाग ने बताया कि “ईश्वरपुर” नाम प्रशासनिक नियमों के अनुरूप है और इसकी देवनागरी तथा रोमन वर्तनी को भारतीय लिपियों के सटीक ध्वन्यात्मक मानकों के अनुसार तय किया गया है। नाम का लिप्यंतरण डायक्रिटिक्स पद्धति से किया गया है ताकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्पष्ट रूप से मान्यता प्राप्त रहे।

 

सर्वे ऑफ इंडिया ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि नए नाम का गजट नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाए। इसके साथ ही, इसकी प्रति देहरादून स्थित मुख्यालय, गृह मंत्रालय, भारत के महासर्वेक्षक कार्यालय, जयपुर स्थित पश्चिमी क्षेत्र कार्यालय तथा पुणे के महाराष्ट्र एवं गोवा भू-स्थानिक निदेशालय को भेजने का सुझाव दिया गया है। यह सुनिश्चित करेगा कि देशभर के सभी मानचित्रों, सरकारी रिकॉर्ड्स और प्रशासनिक दस्तावेज़ों में “ईश्वरपुर” नाम को आधिकारिक रूप से दर्ज किया जा सके।

 

स्थानीय लोगों ने इस बदलाव का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कदम केवल नाम बदलने का नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक भावनाओं को सम्मान देने का प्रतीक है। कई स्थानीय संगठनों ने इसे “आस्था और परंपरा के पुनर्स्थापन का क्षण” बताया है। इस्लामपुर से ईश्वरपुर बनने की यह प्रक्रिया अब महाराष्ट्र के इतिहास में एक अहम अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है, जो आने वाले समय में राज्य की पहचान से जुड़ी सांस्कृतिक नीतियों को भी प्रभावित कर सकती है।

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