INTERPOL का ऑपरेशन HAECHI VI: भारत समेत 40 देशों में साइबर फ्रॉड के पैसे बरामद
इंटरपोल और 40 देशों की संयुक्त कार्रवाई में 439 मिलियन डॉलर जब्त, 68,000 से ज्यादा बैंक खाते और 400 क्रिप्टो वॉलेट ब्लॉक
इंटरपोल ने एक बड़े वैश्विक ऑपरेशन HAECHI VI के तहत भारत समेत 40 देशों में साइबर फ्रॉड पर कड़ा शिकंजा कसा है। अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच चलाए गए इस अभियान में करीब 439 मिलियन डॉलर की बरामदगी हुई। इसमें से 342 मिलियन डॉलर सरकारी धन और 97 मिलियन डॉलर नकदी व वर्चुअल संपत्तियों के रूप में सामने आए। यह कार्रवाई इंटरपोल की अब तक की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध विरोधी पहल मानी जा रही है।
इस ऑपरेशन में पुलिस और जांच एजेंसियों ने मिलकर 68,000 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर दिया, जबकि करीब 400 क्रिप्टो वॉलेट भी ब्लॉक किए गए। इनमें से 16 मिलियन डॉलर का अवैध धन सीधे क्रिप्टो वॉलेट से बरामद हुआ, जिसे साइबर अपराधों से कमाया गया था। इंटरपोल का कहना है कि इस ऑपरेशन का लक्ष्य 7 बड़े साइबर फ्रॉड पैटर्न को निशाना बनाना था, जिनमें वॉइस फिशिंग, रोमांस स्कैम, ऑनलाइन सेक्सटॉर्शन, निवेश धोखाधड़ी, अवैध ऑनलाइन जुआ मनी लॉन्ड्रिंग, बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज और ई-कॉमर्स फ्रॉड शामिल हैं।
कई देशों में इस ऑपरेशन के बड़े नतीजे सामने आए। फिलीपींस में POGO से जुड़े कई मामलों की जांच हुई, वहीं मकाऊ (चीन) में मोबाइल और ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म पर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह पर शिकंजा कसा गया। पुर्तगाल में सामाजिक सुरक्षा फंड की चोरी करने वाले गिरोह के 45 आरोपियों को गिरफ्तार कर 2.28 लाख यूरो बरामद किए गए। थाईलैंड में बिजनेस ईमेल स्कैम से 6.6 मिलियन डॉलर की चोरी रोकी गई, जबकि मलेशिया में साइबर धोखाधड़ी गिरोह से दर्जनों लैपटॉप और सिम कार्ड जब्त किए गए। कोरिया और दुबई के बीच लिंक वाले स्कैम से लगभग 3.91 मिलियन डॉलर की राशि रोककर वापस कराई गई।
इंटरपोल के Financial Crime और Anti-Corruption Centre के डायरेक्टर थेओस बैडेगे ने इस ऑपरेशन को वैश्विक सहयोग का बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, “अक्सर लोग सोचते हैं कि फ्रॉड से खोया पैसा वापस नहीं मिलता, लेकिन HAECHI VI ने साबित किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय से यह संभव है।”
इस अभियान में अल्बानिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, भारत, जर्मनी, जापान, मलेशिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, सिंगापुर, थाईलैंड, यूएई और अमेरिका समेत कुल 40 देश शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन से साइबर अपराधियों पर दबाव बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।
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