उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा कदम: एमएसएमई और फुटवियर-लेदर सेक्टर के लिए दो नई नीतियों का प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने और निवेश के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए दो अहम नीतियों का प्रस्ताव रखा है। पहली नीति “एमएसएमई औद्योगिक आस्थान प्रबंधन नीति” के ज़रिए औद्योगिक क्षेत्रों के रखरखाव और संचालन की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी, जबकि दूसरी नीति “फुटवियर, लेदर और नॉन लेदर क्षेत्र विकास नीति 2025” को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति के रूप में तैयार किया गया है।
एमएसएमई नीति के तहत प्रदेश के औद्योगिक आस्थानों में रिक्त भूमि, शेड और भूखंडों का आवंटन अब ई-नीलामी के ज़रिए किया जाएगा। यह प्रक्रिया किराया या लीज आधारित होगी और इसमें लीज की अवधि तथा नीलामी प्रक्रिया का निर्धारण उद्योग विभाग के निदेशक द्वारा किया जाएगा। इसके साथ ही क्षेत्रवार रिज़र्व प्राइस भी तय किए गए हैं, जैसे कि पश्चिमांचल में ₹3,000 प्रति वर्गमीटर, मध्यांचल में ₹2,500, और पूर्वांचल व बुंदेलखंड में ₹2,000 प्रति वर्गमीटर। हर साल 1 अप्रैल से दरों में 5% की वृद्धि की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर, “फुटवियर, लेदर और नॉन लेदर नीति 2025” का मकसद निर्यात को बढ़ावा देना और इस सेक्टर को निवेश के लिए आकर्षक बनाना है। इसमें तकनीकी उन्नयन, आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर ज़ोर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इस नीति से घरेलू व विदेशी निवेशकों को बेहतर व्यावसायिक माहौल मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में लाई गई यह पहल यूपी को देश का लेदर और फुटवियर हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे राज्य में उद्योगों की संख्या बढ़ेगी, एमएसएमई को स्थायित्व मिलेगा और युवाओं के लिए नए रोजगार के रास्ते खुलेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह नीतियां ज़मीन पर प्रभावी ढंग से लागू की जाती हैं, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास में अग्रणी राज्य बन सकता है।
Share this content:
