April 20, 2026

रेयर अर्थ मेटल की कमी से भारत सरकार की PLI स्कीम पर खतरा, इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में संकट के संकेत

भारत में रेयर अर्थ मेटल्स की आपूर्ति को लेकर संकट गहराता जा रहा है, जिसका सीधा असर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी PLI (Production Linked Incentive) स्कीम पर दिखने लगा है। चीन की ओर से रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई पर लगाम कसने से भारतीय इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में हड़कंप मच गया है। इस स्थिति में न सिर्फ प्रोडक्शन प्रभावित हो सकता है, बल्कि एक्सपोर्ट पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

ECMS (Electronics Components Manufacturing Scheme) के तहत निवेश करने वाले कई आवेदकों ने सरकार को आगाह किया है कि यदि जल्द सप्लाई चैन को स्थिर नहीं किया गया तो प्रोडक्शन बंद करना पड़ सकता है। रेयर अर्थ मेटल्स जैसे नियोडियम, प्रासोडियम, डाइसप्रोसियम जैसे तत्व आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और मैग्नेटिक उपकरणों के निर्माण में अत्यंत आवश्यक हैं।

भारत इन आवश्यक खनिजों के लिए अभी भी चीन पर बुरी तरह निर्भर है। चीन की ओर से इनकी निर्यात पर संभावित रोक या कटौती का मतलब है कि स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, मेडिकल डिवाइसेस और टेलीकॉम उपकरण जैसे क्षेत्रों में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार अब वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं और घरेलू खनन को बढ़ावा देने के उपायों पर काम कर रही है। हालांकि इसमें समय लग सकता है, जिससे निकट भविष्य में उत्पादन बाधित रहने की संभावना बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी योजनाओं को भी झटका लग सकता है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की स्थिरता के लिए सरकार को जल्द रणनीतिक फैसले लेने होंगे।

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