रात की खामोशी में छलकती बोतलें: किसकी शह पर चल रही है माया देवी की मधुशाला?
नियमों की धज्जियां, पुलिस की चुप्पी
कृष्णा नगर के केसरीखेड़ा फाटक पर स्थित मायादेवी के देसी शराब ठेके पर हर रात कानून का मखौल उड़ाया जा रहा है। सरकार के स्पष्ट आदेश हैं कि रात 10 बजे के बाद शराब की बिक्री प्रतिबंधित है, लेकिन यहां रात 11 बजे तक खुलेआम दारू बेची जाती है। सबसे हैरानी की बात यह कि ठेके के सामने मौजूद पुलिसकर्मी सब कुछ देख कर भी चुप रहे। क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत?
शराब के अड्डे में बदलता मोहल्ला
ठेके के बाहर लोग देर रात तक शराब पीते हैं, जिससे वहां का माहौल अशांत हो चुका है। केसरीखेड़ा फाटक पर पुल निर्माण के चलते रास्ता वैसे ही असुविधाजनक हो गया है, ऊपर से शराब पीने वालों की भीड़ आने-जाने वाली महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करती है।
प्रशासन की नींद या अपराधियों से सांठगांठ?
इन घटनाओं की शिकायत के बावजूद थाना कृष्णा नगर के अधिकारी मौन हैं। यही चुप्पी छोटे अपराधों को बड़े अपराधों में बदलती है। महिलाएं रोज़ डर के साए में उस रास्ते से गुजरती हैं, लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

कब मिलेगा महिलाओं को सुरक्षित रास्ता?
मायादेवी के इस ठेके को लेकर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं—क्या शराब माफिया प्रशासन पर हावी है? क्या जनता की सुरक्षा से ज्यादा मुनाफा ज़रूरी है? जवाबदेही तय करना अब जरूरी हो गया है, वरना ये मधुशाला किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है।
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