महंगाई में बड़ी गिरावट के बाद अब क्या आपकी EMI भी होगी कम? अगस्त में आरबीआई ले सकता है बड़ा फैसला
देश में खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़ों में रिकॉर्ड गिरावट देखने को मिली है, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास ब्याज दरों में कटौती का एक और मौका बनता दिख रहा है। जून महीने में खुदरा महंगाई 70 बेसिस प्वाइंट से ज्यादा गिरकर 2.1 फीसदी पर आ गई है, जो बीते छह वर्षों का न्यूनतम स्तर है। यह गिरावट बाजार और जानकारों के अनुमानों से भी ज्यादा है। सब्जियों, दालों, मांस-मछली, दूध और मसालों जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी कमी इसका प्रमुख कारण है। वहीं थोक महंगाई भी गिरकर 0.13 फीसदी पर आ गई है, जो 19 महीनों में पहली बार शून्य से नीचे पहुंची है।
इससे पहले मई में खुदरा महंगाई 2.82 फीसदी थी और जून 2024 में यह आंकड़ा 5.08 फीसदी था। यानी सालभर में महंगाई दर में लगभग तीन फीसदी की गिरावट आई है। एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक यह गिरावट मुख्यतः बेहतर मानसून और उत्पादन में बढ़ोतरी की वजह से आई है। दूसरी ओर, थोक महंगाई की बात करें तो खाद्य वस्तुएं, खनिज तेल, पेट्रोलियम और धातुओं की कीमतें कम होने से उसमें भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। जून में खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर 3.75 फीसदी से घटकर शून्य से नीचे 1.06 फीसदी हो गई।
अब सवाल यह है कि क्या इस महंगाई में गिरावट का फायदा आम लोगों को EMI में राहत के रूप में मिलेगा? जानकारों का मानना है कि अगस्त में होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में 35 से 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती संभव है। चूंकि खुदरा महंगाई लगातार आरबीआई के संतोषजनक स्तर से नीचे बनी हुई है और जुलाई के आंकड़े भी आने से पहले ही नीति बैठक होनी है, इसलिए ब्याज दरों में और कटौती की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
आरबीआई इस साल अब तक तीन बार रेपो रेट में कटौती कर चुका है। फरवरी में 25 बेसिस प्वाइंट, अप्रैल में 25 और जून में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती के बाद रेपो रेट अब 5.5 फीसदी पर आ गया है। यानी इस साल अब तक कुल 1 फीसदी की राहत दी जा चुकी है। आरबीआई ने अपना स्टांस भी ‘न्यूट्रल’ कर दिया है और गवर्नर पहले ही संकेत दे चुके हैं कि महंगाई का ट्रेंड अनुकूल रहा तो और राहत मिल सकती है।
अगर अगस्त की बैठक में भी 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती होती है, तो इसका सीधा असर लोन की ब्याज दरों और EMI पर पड़ेगा। होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वालों को बड़ी राहत मिल सकती है। यह कदम न केवल उपभोक्ताओं को राहत देगा, बल्कि मांग और निवेश को भी बढ़ावा देगा। यानी महंगाई में आई गिरावट अब आम आदमी की जेब पर भी सकारात्मक असर डाल सकती है, बस फैसला अब अगस्त की एमपीसी मीटिंग पर टिका है।
Share this content:
