चार शादियों वाला वो पिता, जिसने बेटी से तोड़ लिए थे सारे रिश्ते, अब खुद बताया क्यों आई थी दूरियां
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता कबीर बेदी जितना अपने अभिनय के लिए जाने जाते हैं, उतना ही वह अपनी निजी ज़िंदगी को लेकर भी चर्चा में रहते हैं। उनकी चार-चार शादियों से लेकर उनके रिश्तों में आए उतार-चढ़ाव तक, हर बात मीडिया की सुर्खियों में रही है। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाला पल तब आया जब यह सामने आया कि उन्होंने अपनी बेटी पूजा बेदी से तीन साल तक सारे रिश्ते तोड़ लिए थे। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि संपत्ति के विवाद और चौथी शादी के चलते पिता-बेटी के बीच दूरी बढ़ी थी, लेकिन अब खुद कबीर बेदी ने इन बातों पर चुप्पी तोड़ी है और रिश्ते को लेकर खुलकर बात की है।
हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में कबीर बेदी ने बेटी पूजा से अपने रिश्ते में आई कड़वाहट और बाद में बनी सुलह पर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि हर रिश्ते में गलतफहमियां होती हैं और ऐसा उनके साथ भी हुआ। कबीर बोले, “मैं उन वजहों को दोबारा नहीं दोहराना चाहता, लेकिन कुछ बातें थीं जिनसे मैं परेशान था, और हो सकता है कि मैंने भी कुछ ऐसा किया हो जिससे पूजा को तकलीफ पहुंची हो। लेकिन जरूरी बात ये है कि अब वो गलतफहमियां खत्म हो गई हैं और हमारा रिश्ता फिर से बेहतर हो रहा है।”
पूजा बेदी, कबीर की पहली पत्नी प्रोतिमा बेदी की बेटी हैं। कबीर ने बाद में परवीन दुसांज से चौथी शादी की, जिसे लेकर यह चर्चा गर्म हुई कि शायद यही शादी बाप-बेटी के बीच दूरियों की वजह बनी। जब कबीर से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “परवीन अकेली वजह नहीं थी, कई और कारण थे, जिन पर बात करने का अब कोई मतलब नहीं। अच्छा ये है कि अब सब ठीक है। मैं पूजा से प्यार करता हूं, परवीन से भी। दोनों का अपना-अपना करियर है और मैं दोनों पर गर्व करता हूं।”
कबीर ने अपनी चौथी पत्नी परवीन दुसांज की तारीफ करते हुए बताया कि वह एक स्वतंत्र और कामयाब महिला हैं, जिन्होंने नेटफ्लिक्स के लिए ‘बैड बॉय बिलियनेयर’ जैसी डॉक्यूमेंट्री बनाई है और अब कई और प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। कबीर ने ये भी बताया कि पूजा का करियर भी शानदार है और उन्हें इस बात की खुशी है कि दोनों महिलाएं अपने जीवन में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि अब वह और पूजा एक-दूसरे से मिलते हैं, बातें करते हैं और उनके बीच प्यार व सम्मान का रिश्ता फिर से कायम हो चुका है।
कबीर बेदी की यह स्वीकारोक्ति न केवल एक पिता-बेटी के जटिल रिश्ते की गहराई को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि समय के साथ गलतफहमियां दूर की जा सकती हैं। आज जब दोनों एक ही शहर में रहते हैं और एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा बने हुए हैं, तो यह उन रिश्तों के लिए भी एक मिसाल है जो कभी टूटने की कगार पर आ जाते हैं लेकिन संवाद और समझदारी से फिर जुड़ जाते हैं।
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