अमेरिकी संसद में क्रिप्टोकरेंसी को मिलने जा रही कानूनी ताकत, बिटकॉइन पहली बार $1.23 लाख के पार
क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में एक बार फिर से जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है, और इसकी बड़ी वजह अमेरिका की राजनीति में हो रहे बदलाव हैं। सोमवार को अमेरिकी संसद में एक ऐसा बिल बहस के लिए पेश होने वाला है, जो क्रिप्टोकरेंसी को सपोर्ट करता है और उसे कानूनी रूप से ताकत देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस संभावित कानून को लेकर बाजार में उत्साह है, और उसी का असर बिटकॉइन की कीमतों पर भी साफ देखा जा सकता है। बिटकॉइन पहली बार 1.23 लाख डॉलर के स्तर को पार कर गया है, जो इसके इतिहास का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
जानकारों का मानना है कि इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का क्रिप्टोकरेंसी के प्रति झुकाव है। ट्रंप पहले भी कई बार डिजिटल करेंसी को समर्थन देने की बात कर चुके हैं। यही नहीं, वो खुद एक क्रिप्टो आधारित कंपनी से भी जुड़े हुए हैं, जिसने हाल ही में पाकिस्तान सरकार के साथ एक अहम डील भी साइन की है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिप्टो सेक्टर को स्थायित्व और राजनीतिक समर्थन मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे बाजार में नई ऊर्जा दिखाई दे रही है।
CoinMarketCap के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार दोपहर 1 बजकर 15 मिनट तक बिटकॉइन की कीमत $122,829.41 तक पहुंच गई थी, जो 24 घंटे पहले की तुलना में करीब 4% अधिक है। कारोबारी सत्र के दौरान यह कीमत और बढ़कर $123,091.61 तक पहुंची, जो अब तक का रिकॉर्ड हाई है। यह पहली बार है जब बिटकॉइन ने $1.23 लाख का आंकड़ा पार किया है। इससे पहले रविवार को यह $1.20 लाख के पार पहुंचा था। एक हफ्ते में बिटकॉइन की कीमत में करीब 13% का इजाफा हुआ है, जबकि साल 2025 की शुरुआत से अब तक इसमें 29% की तेजी देखी गई है। और अगर पिछले एक साल की बात करें, तो निवेशकों को बिटकॉइन से 104% का जबरदस्त रिटर्न मिला है।
बिटकॉइन के साथ-साथ अन्य क्रिप्टोकरेंसी में भी तेजी का रुझान देखा जा रहा है। बीते 24 घंटों में ग्लोबल क्रिप्टो मार्केट कैप में 3.5% की वृद्धि हुई है और कुल कैप अब 3.8 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। यह आंकड़ा बताता है कि सिर्फ बिटकॉइन ही नहीं, बल्कि पूरी क्रिप्टो मार्केट को इस राजनीतिक समर्थन से बूस्ट मिल रहा है।
अब जब अमेरिकी संसद में क्रिप्टो-सपोर्टिव बिल पेश होने वाला है, तो यह न केवल अमेरिका के निवेशकों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक क्षण हो सकता है। भारत जैसे देश, जहां क्रिप्टो पर अभी भी स्पष्ट नीतियां बन रही हैं, उनके लिए भी यह वैश्विक रुख दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
अभी के लिए तो यह साफ है कि ट्रंप सरकार के इस कदम और संसद में संभावित बहस ने क्रिप्टो निवेशकों में नई उम्मीदें जगा दी हैं, और बाजार में आने वाले दिनों में और उछाल देखा जा सकता है — खासकर अगर यह बिल पास हो गया, तो क्रिप्टो इंडस्ट्री को कानूनी सुरक्षा और स्थायित्व का एक नया आधार मिल सकता है।
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