April 18, 2026

क्या अंपायर्स के फैसलों ने छीनी वेस्टइंडीज़ की बड़ी बढ़त? विवादों में घिरा बारबाडोस टेस्ट, प्लेयर्स के साथ हुआ अन्याय?

बारबाडोस में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ के बीच चल रहे पहले टेस्ट मैच ने जहां गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन के चलते रोमांच पैदा किया है, वहीं अंपायर्स के कुछ फैसलों ने इस मुकाबले को विवादों के घेरे में ला दिया है। महज दो दिन में ही जहां कुल 24 विकेट गिर चुके हैं, वहीं सवाल उठ रहे हैं कि क्या अंपायर्स की गलतियों ने वेस्टइंडीज़ से बड़ी बढ़त छीन ली?

वेस्टइंडीज़ की टीम ने पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया को 180 रनों पर समेटने के बाद 190 रन बनाए और 10 रनों की मामूली लेकिन अहम बढ़त हासिल की। हालांकि, इस बढ़त को और भी मजबूत किया जा सकता था, अगर दो अहम बल्लेबाज विवादित अंपायरिंग का शिकार न हुए होते।

पहला मामला सामने आया वेस्टइंडीज़ के अनुभवी बल्लेबाज़ शे होप का, जब वे ब्यू वेबस्टर की गेंद पर कट शॉट लगाने के चक्कर में विकेटकीपर एलेक्स कैरी के हाथों कैच आउट दिए गए। रीप्ले में साफ नजर आया कि कैरी का ग्लव्स गेंद को पकड़ने से पहले जमीन से छू गया था, लेकिन इसके बावजूद थर्ड अंपायर ने उन्हें आउट करार दिया, जिससे ड्रेसिंग रूम और फैंस में खलबली मच गई।

दूसरी विवादित स्थिति सामने आई कप्तान रोस्टन चेज के रूप में, जो उस वक्त 44 रन बनाकर क्रीज पर जमे हुए थे। पैट कमिंस की एक गेंद उनके पैड पर लगी और अंपायर की उंगली उठने से पहले ही चेज ने तुरंत DRS लिया। अल्ट्रा एज में गेंद पैड से लगने से पहले स्पाइक दिखा, लेकिन थर्ड अंपायर ने यह कहकर उन्हें आउट करार दिया कि बल्ले और गेंद के बीच गैप था। यहां तक कि यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि अल्ट्रा एज पर दिख रही स्पाइक किस वजह से थी—गेंद बल्ले से टकराई थी या सिर्फ पैड से?

इन दोनों विवादित फैसलों ने वेस्टइंडीज़ की पारी को भारी नुकसान पहुंचाया। जहां शे होप 48 रन बनाकर अच्छी लय में थे, वहीं रोस्टन चेज एक ठोस अर्धशतक की ओर बढ़ रहे थे। अगर इन दोनों बल्लेबाज़ों को गलत आउट न दिया जाता, तो वेस्टइंडीज़ की बढ़त 10 रन से कहीं ज्यादा हो सकती थी और मैच पर उनका नियंत्रण और भी मजबूत होता।

अब जब ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी में चार विकेट पर 92 रन बना चुका है, तो यह मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर खड़ा है। लेकिन वेस्टइंडीज़ खेमे में यह सवाल गूंज रहा है—क्या निष्पक्ष अंपायरिंग होती, तो तस्वीर कुछ और होती? यही वजह है कि इन विवादों ने एक बार फिर टेस्ट क्रिकेट में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और अंपायरिंग के स्तर पर बहस को जिंदा कर दिया है।

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