ट्रूडो की विदाई के बाद कनाडा ने बदली रणनीति, पीएम कार्नी का भारत को न्योता सिख उग्रवादियों पर पड़ा भारी
कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कार्यभार संभालते ही भारत से रिश्तों को प्राथमिकता दी है, जिससे भारत-कनाडा संबंधों में आई दरार भरने के संकेत मिल रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के विवादास्पद बयानों और सिख उग्रवादियों के साथ उनके नरम रुख से जहां संबंधों में तल्खी आई थी, वहीं कार्नी के संतुलित दृष्टिकोण से रिश्तों में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को G-7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रण भेजना इसी बदली हुई नीति का स्पष्ट संकेत है।
इस बीच भारत की तकनीकी शक्ति की झलक भी सामने आई जब प्रधानमंत्री ने कटरा से श्रीनगर तक वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। चिनाब नदी पर बना विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज, एफिल टावर से भी ऊंचा, इस परियोजना की शान है। यह पुल न केवल तकनीकी चमत्कार है बल्कि यह घाटी को भारत की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ठोस कदम है। इससे न केवल आवागमन सरल होगा, बल्कि कश्मीर के दूरदराज इलाकों का समेकन भी तेज होगा।
दूसरी ओर, अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उद्योगपति एलन मस्क के बीच चल रही तनातनी ने भी वैश्विक आर्थिक समीकरणों को प्रभावित किया है। मस्क ने ट्रंप की नीतियों का विरोध करते हुए उनके खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है, यहां तक कि नासा के लिए स्पेसएक्स सेवाएं रोकने और अमेरिका छोड़कर निवेश कनाडा जैसे देशों में ले जाने की चेतावनी भी दी है। इससे वैश्विक निवेश के लिए नए दरवाजे खुल सकते हैं, जिससे भारत जैसे देशों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।
जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में सिख अतिवादियों को राजनीतिक समर्थन मिलने से भारत-कनाडा संबंधों में खटास आई थी। ट्रूडो द्वारा भारत के आंतरिक मामलों पर बार-बार टिप्पणी करना और भारत विरोधी तत्वों को समर्थन देना इन संबंधों में बड़ी बाधा रहा। उनकी सरकार में जगमीत सिंह जैसे अतिवादी नेताओं का प्रभाव साफ दिखाई देता था। भारत पर आरोप लगाने से लेकर कनाडा में चीन के संदिग्ध हस्तक्षेप को नजरअंदाज करने तक, ट्रूडो की नीतियां विवादों में घिरी रहीं।
मार्क कार्नी ने इन सभी मुद्दों पर संयमित रुख अपनाते हुए न केवल भारत से संबंध सुधारने का वादा किया, बल्कि सिख कट्टरपंथियों के लिए भी सख्त संदेश दिया। ब्रिटेन और कनाडा के आर्थिक प्रमुख के तौर पर काम कर चुके कार्नी नीतिगत रूप से मज़बूत और सधे हुए नेता माने जाते हैं। उन्होंने अपनी कैबिनेट में अनिता आनंद जैसी भारतवंशी मंत्री को शामिल कर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भारतवंशियों को कनाडा में महत्त्वपूर्ण भूमिका दी जाएगी। ट्रूडो की सियासी विदाई और कार्नी की नई नीति से यह तय माना जा रहा है कि भारत-कनाडा रिश्तों में अब गर्मजोशी लौटेगी।
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