विकास की गति बढ़ानी होगी, टीम इंडिया की तरह काम करें तो लक्ष्य असंभव नहीं…Niti Aayog की बैठक में बोले PM मोदी
शनिवार को दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसने भारत के भविष्य की दिशा और दशा तय करने के लिए एक विस्तृत और दूरदर्शी खाका प्रस्तुत किया। इस बैठक का मुख्य विषय था: “विकसित राज्य के लिए विकसित भारत@2047”, जो न केवल केंद्र और राज्य सरकारों के साझा सहयोग का प्रतीक है, बल्कि यह उस दूरगामी दृष्टिकोण का संकेत भी है, जिसमें भारत को आने वाले 22 वर्षों में एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व मंच पर स्थापित करने की महत्वाकांक्षा दिखाई देती है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंच से स्पष्ट रूप से कहा कि अब समय आ गया है जब देश को ‘विकास की गति’ को दोगुना करना होगा, और इसके लिए केवल केंद्र सरकार की नीतियाँ पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि सभी राज्यों को मिलकर एक टीम इंडिया के रूप में काम करना होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब हर राज्य विकसित होगा, तभी भारत एक विकसित राष्ट्र बनेगा। यह केवल सरकार की आकांक्षा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक आकांक्षा है, जिसे साकार करना हम सबकी जिम्मेदारी है।
इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से भारत में हो रहे तेज़ शहरीकरण की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि आने वाले समय में शहरों को केवल आधुनिक बनाने का नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने का दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहर केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं होने चाहिए, बल्कि नवाचार, टिकाऊपन और संतुलित विकास के केंद्र बनने चाहिए। उन्होंने तीन प्रमुख स्तंभों — ग्रोथ (विकास), इनोवेशन (नवाचार) और सस्टेनबिलिटी (स्थिरता) — को शहरी विकास का इंजन बताया, और कहा कि यदि हमारे शहर इन तीनों को मूलभूत आधार बनाकर तैयार किए जाएं, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक शहरी विकास मॉडल बन सकता है। उन्होंने उदाहरण के रूप में कहा कि शहरों को ऐसे बनाना चाहिए जो ना केवल जीवन को सुविधाजनक बनाएं बल्कि पर्यावरण, संसाधनों और सामाजिक संरचनाओं के प्रति संवेदनशील भी हों।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने राज्यों के लिए एक अभिनव अवधारणा प्रस्तुत की: ‘एक राज्य – एक वैश्विक पर्यटन गंतव्य’। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को कम से कम एक ऐसा स्थल विकसित करना चाहिए जो पूरी दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे स्थलों को वैश्विक मानकों के अनुसार विकसित किया जाए, जहां पर्यटकों के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं हों और साथ ही उस स्थल की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक या प्राकृतिक विरासत भी सुरक्षित रहे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जब कोई स्थान अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करता है, तो न केवल उस विशेष क्षेत्र का विकास होता है, बल्कि आस-पास के शहरों और गांवों को भी इससे लाभ मिलता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलता है और समग्र आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ होती हैं। यह रणनीति भारत के पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने की क्षमता रखती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बैठक के दौरान यह भी रेखांकित किया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह विकास समावेशी होना चाहिए, जिसमें हर राज्य, हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने विशेष रूप से कौशल विकास, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और स्थायी व दीर्घकालिक रोजगार सृजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य सरकारों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं को कुशल बनाएं, नवाचार आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा दें और ऐसे वातावरण का निर्माण करें जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हों।
बैठक का महत्व केवल इस कारण नहीं था कि इसमें देश के प्रधानमंत्री ने बड़े लक्ष्य निर्धारित किए, बल्कि इस कारण भी था कि यह मंच केंद्र और राज्य सरकारों को एक साथ लाकर, उन्हें एक-दूसरे की चुनौतियों और संभावनाओं को समझने का अवसर देता है। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की यह बैठक वास्तव में भारत के संघीय ढांचे को मजबूती देने वाली प्रक्रिया का एक हिस्सा है, जहां विकास के मार्ग पर कोई राज्य पीछे न छूटे और सबको बराबरी का अवसर मिले। प्रधानमंत्री ने इसे केवल एक औपचारिक मीटिंग नहीं, बल्कि एक ऐसा संयुक्त प्रयास बताया, जिससे भारत की बुनियाद और भी मजबूत हो सकती है और देश विकास के उस मुकाम तक पहुंच सकता है जहां वह न केवल आत्मनिर्भर हो, बल्कि वैश्विक नेतृत्व में भी अग्रणी भूमिका निभा सके।
यह बैठक एक स्पष्ट संकेत थी कि भारत अब भविष्य की ओर देख रहा है, लेकिन वह भविष्य सिर्फ आंकड़ों या योजनाओं में नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव में, लोगों के जीवन में बेहतरी लाने में, और राष्ट्र को हर दृष्टिकोण से शक्तिशाली और समावेशी बनाने में निहित है। प्रधानमंत्री मोदी का यह उद्बोधन केवल एक वक्तव्य नहीं, बल्कि भारत के विकास की एक बड़ी रूपरेखा थी—एक ऐसा रोडमैप जिसमें हर राज्य, हर नागरिक और हर संस्था की भागीदारी जरूरी है। अब सवाल यह नहीं है कि भारत क्या बन सकता है, बल्कि यह है कि क्या हम सब एकजुट होकर उस भारत को बना पाएंगे जिसकी कल्पना 2047 के विकसित भारत में की जा रही है।
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