April 30, 2026

झारखंड के जंगल में 15 साल से छुपा “आतंक का बादशाह” पप्पू लोहरा आखिर ढेर, 10 लाख के इनामी नक्सली का खात्मा

वो नाम जिसने एक दशक से ज्यादा वक्त तक झारखंड के घने जंगलों में डर का साया बनाए रखा। वही पप्पू लोहरा—जिसने झारखंड जगुआर जैसी विशेष फोर्स को चुनौती दी थी, और 2021 में डिप्टी कमांडेंट राजेश कुमार को गोली मारकर शहीद कर दिया था। 10 लाख के इनामी इस कुख्यात नक्सली का अंत अब सुरक्षा बलों ने कर दिया है।

शनिवार को लातेहार जिले के इचाबार जंगल में ऑपरेशन चला और इसी के तहत सुरक्षा बलों ने पप्पू लोहरा को एनकाउंटर में मार गिराया। उसके साथ उसका खास साथी, 5 लाख का इनामी नक्सली प्रभात गंझू भी ढेर कर दिया गया। वहीं एक और नक्सली पुलिस मुठभेड़ के दौरान घायल अवस्था में ज़िंदा पकड़ा गया है।

एनकाउंटर की कहानी: कैसे पहुंचा पप्पू तक सिस्टम?
सुरक्षा एजेंसियों को पक्की जानकारी मिली थी कि पप्पू लोहरा अपने गिरोह के साथ जंगल में किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहा है। इसी सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी।

जैसे ही फोर्स आगे बढ़ी, नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में पप्पू लोहरा और प्रभात गंझू मारे गए। एक नक्सली को गोली पैर में लगी और वो मौके पर ही धर लिया गया।

झारखंड पुलिस का एक जवान घायल
मुठभेड़ के दौरान झारखंड पुलिस के जवान अवध सिंह भी घायल हो गए। घायल पुलिसकर्मी और नक्सली को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कौन था पप्पू लोहरा?

झारखंड जन मुक्ति परिषद (J.J.M.P.) का सरगना

15 वर्षों से लातेहार, लोहरदगा, पलामू ज़िले में सक्रिय

98 केस दर्ज: हत्या, लूट, रंगदारी, आगजनी समेत

2006-07 में माओवादी संगठन से अलग होकर संजय यादव के साथ मिलकर नया संगठन बनाया

2009-10 में J.J.M.P. में शामिल होकर बना इसका मुखिया

क्या कहता है यह एनकाउंटर?
यह सिर्फ एक नक्सली के मारे जाने की खबर नहीं है, यह उस डर के खात्मे की शुरुआत है जो सालों से जंगलों में पलता रहा। पप्पू लोहरा जैसे नामों का अंत इस बात का संकेत है कि सुरक्षा एजेंसियाँ अब रणनीति के स्तर पर नक्सलियों से दो कदम आगे हैं।

अब अगला निशाना—नक्सलियों की जड़ तक सफाई
सुरक्षा बलों ने साफ किया है कि नक्सली मुक्त झारखंड अभियान अब निर्णायक मोड़ पर है। यह एनकाउंटर उसी कड़ी का हिस्सा है। आने वाले दिनों में अभियान और तेज़ होगा ताकि झारखंड को इस लाल आतंक से पूरी तरह मुक्त किया जा सके।

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