April 26, 2026

वट सावित्री व्रत 2025: जब सावित्री ने यमराज से भिड़कर इतिहास रचा—जानिए इस पौराणिक व्रत की पूरी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पारण का महत्व

एक दिन, एक महिला अपनी पति की मृत्यु की खबर सुनकर यमराज के पीछे-पीछे चल पड़ी। उसने हार नहीं मानी। उसके हाथ में सिर्फ श्रद्धा थी, नज़रों में निष्ठा और मन में दृढ़ संकल्प। अंततः यमराज को उसके प्रेम और सत्य के सामने झुकना पड़ा और उन्होंने उसके मृत पति को जीवनदान दे दिया। यह कोई कहानी नहीं, बल्कि वही कथा है जिससे जुड़ा है—वट सावित्री व्रत।

विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला यह व्रत इस साल 26 मई 2025, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन सोमवती अमावस्या का संयोग भी पड़ रहा है, जो इस व्रत को और भी विशेष बनाता है।

 

पूजा का समय और पंचांग विवरण

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 26 मई दोपहर 12:11 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त: 27 मई सुबह 08:31 बजे

व्रत की तिथि (उदयातिथि अनुसार): 26 मई 2025, सोमवार

पूजा के लिए पूरे दिन शुभ मुहूर्त रहेगा, लेकिन सुबह के समय पूजा करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

 

व्रत का महत्व और पौराणिक मान्यता

वट सावित्री व्रत का वर्णन महाभारत और पुराणों में आता है। इस दिन महिलाएं सावित्री की तरह अपने पति की रक्षा और दीर्घायु की कामना करती हैं। माना जाता है कि यह व्रत करने से पति की आयु लंबी होती है, संतान सुख प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

बरगद (वट वृक्ष) की पूजा का भी विशेष महत्व है क्योंकि इसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश—तीनों देवताओं का निवास स्थल माना गया है।

 

पूजा विधि (Puja Vidhi)

1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं।

2. व्रत का संकल्प लें:
“मम वैधव्य दोष परिहारार्थं, पुत्र-पौत्रादि सकल संतान समृद्ध्यर्थं, सौभाग्य स्थैर्यसिद्धयर्थं वट सावित्री व्रत करिष्ये।”

3. पूजा सामग्री तैयार करें:

बांस की टोकरी में सात अनाज

फल, फूल, भीगे चने, मिठाई

पूरी, खीर, रोली, चंदन, अक्षत

सिंदूर, कच्चा सूत/लाल धागा

जल का कलश, आसन

 

4. बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री, सत्यवान और यमराज की प्रतिमा स्थापित करें (प्रतिमा न हो तो मानसिक रूप से ध्यान करें)।

5. वृक्ष पर जल चढ़ाएं, कुमकुम, हल्दी, अक्षत अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं।

6. कच्चा सूत या लाल धागा पेड़ के तने पर सात बार लपेटें और प्रत्येक परिक्रमा में मंत्र का जाप करें:

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”

“ॐ वटवृक्षाय नमः”

 

7. वट सावित्री व्रत कथा सुनें या पढ़ें।

8. पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए प्रार्थना करें।

 

व्रत पारण विधि

व्रत का पारण 27 मई 2025 को सुबह स्नान के बाद किया जाएगा।

पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें।

पारण में सात्विक भोजन करें और व्रत की पूर्णता के लिए ईश्वर का धन्यवाद करें।

 

धार्मिक मान्यताएं और विशेष बातें

व्रत के दिन बरगद के पेड़ को जल अर्पित करने से संतान सुख प्राप्त होता है।

महिलाएं बरगद की पत्तियां बालों में लगाती हैं, जो सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं।

यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते की पवित्रता, प्रेम और निष्ठा का प्रतीक है।

 

वट सावित्री व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी की निष्ठा, श्रद्धा और अटूट प्रेम का प्रतीक है। यह व्रत हर उस महिला की शक्ति को दर्शाता है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार के लिए अडिग रहती है। सावित्री की तरह हर महिला में वह शक्ति है जो यमराज से भी अपने प्रिय को वापस ला सकती है—बस ज़रूरत है विश्वास की, भक्ति की और श्रद्धा की।

26 मई को जब महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करेंगी, मंत्रों का उच्चारण करेंगी और कहानी सुनेंगी, तो साथ ही वे एक बार फिर इस संस्कृति, परंपरा और आस्था को जीवित करेंगी।

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