आंध्र में आतंक पर प्रहार: पहलगाम हमले के बाद भारत की कड़ी कार्रवाई, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद, सिंधु जल संधि निलंबित और पाकिस्तान को 3000 करोड़ की आर्थिक चोट
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है और पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए अटारी-वाघा बॉर्डर को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। यह बॉर्डर भारत-पाकिस्तान के बीच एकमात्र स्थलीय व्यापार मार्ग है, जिससे हर साल हजारों ट्रकों के माध्यम से अरबों रुपये का व्यापार होता है। इस फैसले से पाकिस्तान को लगभग 3000 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान होने की संभावना है। इसके साथ ही भारत ने सिंधु जल संधि को भी निलंबित कर दिया है, जो कि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच छह प्रमुख नदियों के जल बंटवारे को लेकर हुआ था। भारत ने झेलम, चिनाब और सिंधु जैसी पश्चिमी नदियों के पानी के उपयोग पर रोक लगाने की चेतावनी दी है, जिससे पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था और जल संसाधन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार ने पाकिस्तान के नागरिकों के वीजा रद्द करते हुए उन्हें 48 घंटे के भीतर भारत छोड़ने का आदेश भी जारी किया है। साथ ही पाकिस्तान को निर्यात किए जा रहे सामानों पर भी रोक लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। गौरतलब है कि भारत का पाकिस्तान को एक्सपोर्ट 2024 में 1.21 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था, जिसमें मुख्य रूप से फल, सब्जियां, दालें, बासमती चावल, चाय, मसाले, ऑर्गेनिक केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान से भारत में सीमेंट, सेंधा नमक, मुल्तानी मिट्टी, कपास, लेदर और कुछ पारंपरिक उत्पाद जैसे पेशावरी चप्पल और लाहौरी कुर्ते आते हैं।
अटारी बॉर्डर, जो अमृतसर से महज 28 किलोमीटर दूर स्थित है और राष्ट्रीय राजमार्ग-1 से जुड़ा है, भारत का पहला और सबसे महत्वपूर्ण लैंड पोर्ट है। यही पोर्ट अफगानिस्तान के साथ होने वाले व्यापार में भी अहम भूमिका निभाता है। हाल के वर्षों में यहां व्यापार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन 2023-24 में यह बढ़कर 3886 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
सिंधु जल संधि पर भारत की सख्ती से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को और गहरी चोट पहुंच सकती है क्योंकि देश की 25% जीडीपी कृषि पर निर्भर है और सिंधु नदी नेटवर्क उसका मुख्य जल स्रोत है। अगर भारत नदियों का बहाव रोकता है, तो पाकिस्तान में पानी की भारी किल्लत हो सकती है जिससे खेती, पीने का पानी, उद्योग और आम जीवन सभी प्रभावित होंगे। भारत के इन निर्णायक कदमों ने न केवल पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी आतंक के खिलाफ भारत की नीति को मजबूती से रखा है।
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