April 19, 2026

ट्रंप का ‘टैरिफ गेम’: भारत को नुकसान या छिपा है बड़ा मौका? Apple, Tesla समेत दिग्गज कंपनियां बदल सकती हैं प्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। 2 अप्रैल को, ट्रंप ने दुनिया के 60 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जिसमें भारत और चीन जैसे बड़े आर्थिक खिलाड़ी भी शामिल हैं। इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भारत को इससे नुकसान होगा या यह एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है?

ट्रंप ने भारत को “वेरी वेरी टफ पार्टनर” कहकर संबोधित किया, लेकिन साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “महान मित्र” बताते हुए संकेत दिए कि यह केवल व्यापार संतुलन को लेकर सख्ती है, दुश्मनी नहीं। भारत के ऑटो सेक्टर पर 25% और अन्य प्रोडक्ट्स पर 26% तक टैरिफ लगाया गया है।

हालांकि, इसी के कुछ दिन पहले भारत-अमेरिका के बीच BTA (Bilateral Trade Agreement) की पहली मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 190 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करने का लक्ष्य तय किया गया। अमेरिका ने भारत से कुछ औद्योगिक वस्तुओं और डेयरी प्रोडक्ट्स पर शुल्क छूट की मांग की, और शायद यही वजह रही कि भारत के डेयरी प्रोडक्ट्स पर फिलहाल कोई टैरिफ नहीं लगाया गया।

चीन पर पड़ा भारी वार, भारत बन सकता है नया गंतव्य

ट्रंप का सबसे कड़ा वार चीन पर पड़ा है, जहां 34% का टैरिफ लगाया गया। जवाब में चीन ने भी अमेरिका के सभी उत्पादों पर उतना ही टैरिफ लागू कर दिया। इससे अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर और गहरा गया है। इस तनातनी का सबसे बड़ा असर उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ रहा है जो फिलहाल चीन में मैन्युफैक्चरिंग करती हैं।

Tesla जैसी कंपनियों ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वे भारत की ओर रुख कर सकती हैं। फिलहाल भारत में Tesla की कारें CBU यूनिट के तौर पर आ रही हैं, लेकिन आने वाले समय में भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू होने की संभावना तेज हो गई है।

वहीं Apple पहले ही अपने उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा भारत में शिफ्ट कर चुका है। अनुमान है कि भविष्य में Apple अपने कुल iPhone प्रोडक्शन का 25% भारत में करेगा। भारत की स्थिर राजनीतिक व्यवस्था, सस्ते श्रम और बड़ी उपभोक्ता आबादी इसे कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बना रही है।

फायदा या नुकसान?

जहां एक ओर टैरिफ से भारत के कुछ सेक्टर्स को तात्कालिक नुकसान हो सकता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की चीन से दूरी और भारत के साथ बढ़ती नजदीकी, एक लॉन्ग टर्म स्ट्रैटजिक एडवांटेज बन सकती है। अमेरिका भारत को एक वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देख रहा है, और यह स्थिति भारत को वैश्विक व्यापार में नई ऊंचाई तक पहुंचा सकती है।

अब निगाहें आगामी BTA बैठकों पर होंगी, जहां इस टैरिफ को लेकर ज्यादा स्पष्टता और संभावित रियायतों की उम्मीद की जा सकती है।

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