अमेरिका में इजराइली प्रधानमंत्री की ‘अचानक’ एंट्री: टैरिफ, गाजा युद्ध और बंधक संकट पर होगी हाई-लेवल बातचीत, बड़े फैसलों के संकेत?
वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका की अप्रत्याशित यात्रा की है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस दौरे को लेकर न सिर्फ राजनीतिक विश्लेषक, बल्कि दुनियाभर की सरकारें भी अलर्ट मोड पर हैं।
नेतन्याहू ने अपने हंगरी दौरे के तुरंत बाद अमेरिका का रुख किया और वॉशिंगटन डी.सी. में दो दिवसीय ‘क्रिटिकल डिप्लोमैटिक विज़िट’ की शुरुआत की। इस यात्रा का एजेंडा तीन बेहद संवेदनशील और रणनीतिक बिंदुओं पर केंद्रित है:
1. गाजा युद्ध में अमेरिका की भूमिका और समर्थन,
2. बंधकों की सुरक्षित रिहाई,
3. इजराइली वस्तुओं पर लगाए गए नए अमेरिकी टैरिफ।
सोमवार को नेतन्याहू ने अमेरिकी फाइनेंस सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक से मुलाकात की, जहां टैरिफ से संबंधित चिंता खुलकर सामने आई। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने इजराइली वस्तुओं पर 17% तक का टैरिफ लागू करने की घोषणा की थी, जिसने इजराइल में नाराजगी और आर्थिक चिंता दोनों को जन्म दिया। नेतन्याहू को उम्मीद है कि वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली बैठक में इस फैसले पर पुनर्विचार करवाने में सफल होंगे।
इजराइल के लिए अमेरिका केवल एक सहयोगी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भी है। ऐसे में व्यापारिक मोर्चे पर तनाव बढ़ना इजराइली अर्थव्यवस्था के लिए झटका साबित हो सकता है।
वहीं, गाजा में जारी युद्ध और बंधकों की स्थिति को लेकर भी इजराइली प्रधानमंत्री अमेरिका से स्पष्ट और निर्णायक समर्थन की उम्मीद लेकर आए हैं। इन मुद्दों पर व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों और इंटेलिजेंस प्रमुखों के साथ उनकी कई बैठकें निर्धारित हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात तो साफ है—यह कोई सामान्य राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक मोड़ पर खड़ी कूटनीतिक पहल है, जिसके नतीजे न केवल इजराइल-अमेरिका संबंधों को दिशा देंगे, बल्कि मध्य-पूर्व की राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकते हैं।
अब देखना होगा कि क्या नेतन्याहू ट्रंप प्रशासन को मना पाएंगे? क्या टैरिफ में छूट मिलेगी? और क्या गाजा में बंधकों की रिहाई को लेकर कोई ठोस समझौता सामने आएगा?
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