भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों में लैंगिक असमानता: महिलाओं की बोर्ड सीटों की संख्या बेहद कम, रिपोर्ट ने किया चौंकाने वाला खुलासा
भारत में तेजी से बढ़ती हुई यूनिकॉर्न कंपनियों के बारे में यह मान्यता थी कि ये स्टार्टअप पारंपरिक कंपनियों की तुलना में ज्यादा विविधता को प्राथमिकता देती हैं। लेकिन एक नई रिपोर्ट ने इस धारणा को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। प्राइवेटसर्कल रिसर्च द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 116 यूनिकॉर्न कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी में खासी कमी है, और यह स्थिति भारतीय उद्योग जगत में लैंगिक समानता की ओर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।
महिलाओं की हिस्सेदारी बेहद कम
प्राइवेटसर्कल रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की इन 116 यूनिकॉर्न कंपनियों के कुल 1,314 बोर्ड सीटों में से केवल 76 सीटें महिलाओं के पास हैं। इसका मतलब है कि यूनिकॉर्न कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 5.8% है। यह आंकड़ा डेलॉइट की रिपोर्ट “वूमन इन द बोर्डरूम: ए ग्लोबल पर्सपेक्टिव” के आंकड़ों से भी काफी कम है, जिसमें भारतीय उद्योग जगत में महिलाओं की हिस्सेदारी 18.3% और वैश्विक औसत 23.3% है। इस परिप्रेक्ष्य में, भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों का प्रदर्शन काफी पीछे दिखाई देता है, जहां महिलाओं का नेतृत्व में प्रतिनिधित्व बहुत सीमित है।
क्या होती हैं यूनिकॉर्न कंपनियां
कई लोग यह जानने के लिए उत्सुक होते हैं कि यूनिकॉर्न कंपनियां क्या होती हैं। यूनिकॉर्न वे स्टार्टअप कंपनियां होती हैं जिनका मूल्यांकन 1 अरब डॉलर से अधिक होता है, लेकिन वे शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं होतीं। भारत में इस समय ऐसी 116 यूनिकॉर्न कंपनियां हैं, जो इस रिपोर्ट का हिस्सा बनी हैं। इन कंपनियों के वित्तीय आंकड़े और विकास की गति बहुत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन लैंगिक विविधता की स्थिति काफी निराशाजनक है।
महिला निदेशकों की संख्या में कमी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि केवल 56 यूनिकॉर्न कंपनियों में कम से कम एक महिला निदेशक हैं, जो कुल कंपनियों का लगभग 48% हिस्सा है। इसके बावजूद, केवल 13 कंपनियां ऐसी हैं जिनमें एक से अधिक महिला निदेशक हैं। इसका मतलब यह है कि महिला निदेशकों की संख्या बहुत सीमित है, और बड़ी संख्या में कंपनियां अभी भी पुरुषों द्वारा ही संचालित हो रही हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों को लैंगिक समानता के मुद्दे पर अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।
विभिन्न क्षेत्रों में महिला निदेशकों की स्थिति
प्राइवेटसर्कल रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र की यूनिकॉर्न कंपनियां सबसे आगे हैं, जिनमें 16 महिला निदेशक शामिल हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर क्षेत्र (8), रिटेल (7), बीमा (5), यात्रा और आतिथ्य (5) और उभरती प्रौद्योगिकियों (4) क्षेत्रों में महिला निदेशकों की संख्या है। इस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ कंपनियां जैसे कि सी.ई. इन्फो सिस्टम्स लिमिटेड (मैपमाईइंडिया), इनक्रेड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड, मोबिक्विक, पॉलिसी बाजार, नायका, जोमैटो और फ्रैक्टल एनालिटिक्स ने अपने बोर्ड में तीन-तीन महिला निदेशकों को नियुक्त कर एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है, जो अन्य कंपनियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।
क्या यह रिपोर्ट महिलाओं के लिए एक चेतावनी है?
यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले जारी की गई है, जो इसे और भी प्रासंगिक बनाता है। महिला दिवस के अवसर पर यह रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों को लैंगिक विविधता की दिशा में बहुत काम करने की आवश्यकता है। जहां दुनिया भर में महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही हैं, वहीं भारत में इसकी स्थिति अभी भी काफी पीछे है। इस रिपोर्ट के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं को बोर्ड में उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए कंपनियों को न केवल नीतिगत बदलावों की आवश्यकता है, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति और दृष्टिकोण में भी बदलाव करना होगा।
हालांकि भारत में यूनिकॉर्न कंपनियां तेजी से बढ़ रही हैं और दुनिया भर में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं, लेकिन उनकी लैंगिक विविधता की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों में महिलाओं का नेतृत्व में प्रतिनिधित्व बहुत कम है, और इस क्षेत्र को लैंगिक समानता की दिशा में लंबा रास्ता तय करना है। यह रिपोर्ट न केवल भारतीय यूनिकॉर्न कंपनियों के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह हर कंपनी को एक मौका भी देती है कि वह लैंगिक समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बढ़ाए और महिलाओं को नेतृत्व के अवसर प्रदान करें।
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