महिलाएं बन रही हैं भारतीय रियल एस्टेट बाजार की नई शक्ति, क्या बदल रही हैं संपत्ति की तस्वीर?”*
भारतीय रियल एस्टेट बाजार में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां महिलाएं अब सिर्फ घर खरीदने वाली नहीं, बल्कि घर स्वामित्व में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। स्क्वायर यार्ड्स की हालिया रिपोर्ट “की होल्डर्स ऑफ चेंज: विमेन ड्राइविंग रियल एस्टेट ग्रोथ एंड ट्रांसफॉर्मेशन” के अनुसार, महिलाओं का रियल एस्टेट लेनदेन में भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में देश के प्रमुख शहरों में कुल 5.77 लाख आवासीय लेनदेन हुए, जो 2023 की तुलना में 4% ज्यादा हैं, जिनमें से 1.29 लाख लेनदेन केवल महिलाओं द्वारा किए गए, जो 2023 के मुकाबले 14% की वृद्धि है। इस वृद्धि के साथ, महिलाओं की कुल आवासीय लेनदेन में हिस्सेदारी 2023 के 20% से बढ़कर 2024 में 22% तक पहुंच गई है।
यह बदलाव सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का संकेत है। पहले जहां पुरुषों का रियल एस्टेट बाजार में दबदबा था, अब महिलाएं न केवल खरीदार बन रही हैं, बल्कि इस क्षेत्र के विकास में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रही हैं। घर खरीदने वाली महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी, न केवल उनके वित्तीय स्वतंत्रता की ओर एक कदम है, बल्कि यह सामाजिक मानदंडों में बदलाव का भी परिचायक है।
महिलाओं के लिए सरकारी प्रोत्साहन:
महिलाओं के गृहस्वामित्व में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें सरकारी प्रोत्साहन प्रमुख हैं। सरकार ने महिलाओं को स्टांप ड्यूटी में 1-3% तक की छूट दी है, वहीं पंजीकरण शुल्क में भी 0.5-1% तक की राहत दी जा रही है, जिससे महिलाओं के लिए घर खरीदना और भी सस्ता हो गया है। इसके अलावा, प्रमुख बैंकों ने महिलाओं के लिए होम लोन पर 0.05% तक की ब्याज दर में छूट देने का प्रस्ताव दिया है। आयकर अधिनियम की धारा 80सी और 80ईई के तहत मिलने वाली छूट भी महिलाओं के लिए सहायक साबित हो रही है।
शहरों में बढ़ती महिला खरीदारों की संख्या:
स्क्वायर यार्ड्स की इस रिपोर्ट में मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे प्रमुख शहरों का विश्लेषण किया गया है, जहां महिला खरीदारों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। इन शहरों में महिलाएं न केवल घर खरीदने में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं, बल्कि यह संकेत भी मिल रहा है कि महिलाओं के घर खरीदने के फैसले अब पारिवारिक या सामाजिक दबाव से मुक्त हो रहे हैं।
महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता और सामाजिक परिवर्तन:
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ती महिला सहभागिता रियल एस्टेट क्षेत्र में वित्तीय स्वतंत्रता के बढ़ते संकेत के साथ-साथ सामाजिक मानदंडों में भी बदलाव का प्रतीक है। महिलाएं अब रियल एस्टेट बाजार में अपने अधिकारों का दावा कर रही हैं और यह बदलाव पारंपरिक जेंडर भूमिकाओं को चुनौती दे रहा है।
संयुक्त स्वामित्व और पुरुष खरीदारों का आंकड़ा:
हालांकि, पुरुषों द्वारा किए गए लेनदेन में 11% की वृद्धि हुई है, जो 2023 में 1.96 लाख से बढ़कर 2024 में 2.18 लाख हो गए हैं, लेकिन संयुक्त स्वामित्व (पुरुष और महिला) वाले लेनदेन में 7% की कमी आई है। फिर भी, यह अभी भी कुल लेनदेन का 40% हिस्सा है। यह संकेत करता है कि संयुक्त स्वामित्व की प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है, हालांकि महिलाओं का स्वतंत्र रूप से रियल एस्टेट लेनदेन करना बढ़ रहा है।
महिला दिवस पर महत्वपूर्ण रिपोर्ट:
यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले जारी की गई है, जो 8 मार्च को दुनिया भर में मनाया जाता है। यह रिपोर्ट महिलाओं की बढ़ती भूमिका और समाज में उनके सशक्तिकरण का एक उदाहरण पेश करती है।
भारतीय रियल एस्टेट बाजार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल वित्तीय स्वतंत्रता को दर्शाती है, बल्कि यह एक समाजिक बदलाव का भी प्रतीक है, जो भारतीय संस्कृति में नई धारा को जन्म दे रहा है। सरकार द्वारा प्रदान किए गए प्रोत्साहन, महिलाओं की बढ़ती वित्तीय स्थिति और उनके सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदम रियल एस्टेट क्षेत्र को एक नई दिशा दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में, यह बदलाव और तेजी से बढ़ने की संभावना है, जिससे भारतीय रियल एस्टेट बाजार में महिलाओं की भूमिका और भी सशक्त हो सकेगी।
Share this content:
