April 21, 2026

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का IIT हैदराबाद में भाषाओं, नवाचार और कूटनीति पर अहम भाषण, भारत के भविष्य के लिए बड़ा संदेश

भारत की समृद्ध भाषाओं और संस्कृति को लेकर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने IIT हैदराबाद में छात्रों और संकाय से संवाद करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने इस मौके पर भारत की भाषाई विविधता की सराहना की और समावेशिता की भावना को प्रकट किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में अनेक भाषाओं का अस्तित्व है—संस्कृत, हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और कई अन्य भाषाएं, जो भारतीय सभ्यता की विशेषता हैं। उनका कहना था, “क्या भारत की भूमि पर भाषा के आधार पर टकराव की स्थिति होनी चाहिए? हमारी सभ्यता की मूल भावना समावेशिता की बात करती है।”

भारत की भाषाओं को संजोने की आवश्यकता
धनखड़ ने आगे कहा कि हाल ही में कई भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने पर यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण था। उन्होंने भारतीय भाषाओं के महत्व पर बल देते हुए कहा कि ये भाषाएं न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान रखती हैं। इनमें ज्ञान और बुद्धिमत्ता समाहित है, जैसे कि वेद, पुराण, महाकाव्य रामायण, महाभारत और गीता में। उन्होंने जोर दिया कि हमें अपनी भाषाओं को संजोने और उनका संरक्षण करना चाहिए, ताकि हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रख सकें।

पूर्व छात्रों के योगदान से संस्थान को हो सकता है लाभ
उपराष्ट्रपति ने IIT हैदराबाद के छात्रों और संकाय से बात करते हुए विश्वविद्यालयों के एंडोमेंट फंड और पूर्व छात्रों के संघों की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालयों के एंडोमेंट फंड अरबों अमेरिकी डॉलर तक पहुंच रहे हैं। हमें भी अपने पूर्व छात्रों से योगदान प्राप्त करना चाहिए। यह राशि का मामला नहीं है, बल्कि संस्थान से जुड़ाव और सहयोग की भावना महत्वपूर्ण है।” उनका मानना था कि पूर्व छात्रों का योगदान संस्थान की प्रगति में मददगार हो सकता है, और इससे संस्थान का गौरव बढ़ सकता है।

कॉरपोरेट्स से अनुसंधान और नवाचार में निवेश की अपील
धनखड़ ने कॉरपोरेट्स से अनुसंधान और नवाचार में निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्थानों में उत्कृष्टता की कमी नहीं है, जैसे कि IIT और IIM, लेकिन इन संस्थानों को आगे बढ़ाने के लिए उद्योगों को अधिक निवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा, “कॉरपोरेट्स को विकास और नवाचार के लिए निवेश करना चाहिए। इस निवेश से केवल छात्र या संस्थान का लाभ नहीं होगा, बल्कि यह देश के वर्तमान और भविष्य के लिए भी फायदेमंद होगा।”

कूटनीति का बदलता परिदृश्य और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य में अब बड़ा बदलाव आ चुका है। पारंपरिक युद्ध प्रणाली समाप्त हो चुकी है, और अब कूटनीति ही निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा, “नवाचार और अनुसंधान हमें सॉफ्ट डिप्लोमेसी में बढ़त दिलाते हैं और हमें वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करते हैं।” उनका मानना था कि यदि भारत को वैश्विक दिग्गजों से प्रतिस्पर्धा करनी है, तो हमें इस दिशा में तेज़ी से काम करना होगा।

भारत को एक महाशक्ति बनाने की दिशा में कदम
धनखड़ ने पश्चिमी देशों का उदाहरण देते हुए भारतीय कॉरपोरेट्स से अपील की कि वे अपने समकक्षों से क्या कर रहे हैं, इसका अध्ययन करें और भारत को वैश्विक कूटनीति में एक प्रमुख महाशक्ति बनाने के लिए जरूरी कदम उठाएं। उन्होंने कहा, “भारत को नवाचार, अनुसंधान और कूटनीति के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करना है, और इसके लिए हमें तेजी से काम करना होगा।”

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने छात्रों और संकाय से भी अपील की कि वे नए विचारों, शोध, और नवाचार के माध्यम से भारत को एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने में योगदान दें।

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