दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए थर्मल पावर प्लांट नहीं, पराली जलाना और मौसम की स्थिति हैं मुख्य कारण
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को अपने ताजे जवाब में यह महत्वपूर्ण खुलासा किया है कि राजधानी में वायु प्रदूषण के लिए कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट जिम्मेदार नहीं हैं। डीपीसीसी के अनुसार, दिल्ली के आईटीओ, राजघाट और बदरपुर स्थित तीनों कोयला आधारित पावर प्लांट 2009, 2015 और 2018 में बंद कर दिए गए थे, जिसके बाद अब दिल्ली में कोई भी कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट संचालित नहीं हो रहा है।
इस खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के अन्य कारण हैं, जो प्रदूषण के संकट को बढ़ा रहे हैं। डीपीसीसी ने एनजीटी को बताया कि कोर्ट की पिछली सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया था और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता जताई थी। इस मामले को लेकर अदालत ने वायु प्रदूषण के नियमों और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किया था और कई केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से जवाब मांगा था।
पावर प्लांट नहीं, पराली जलाना मुख्य प्रदूषण कारण
मीडिया रिपोर्ट के हवाले से अधिकरण ने स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें फिनलैंड बेस्ड थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के अध्ययन का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दिल्ली में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण पराली जलाना और वाहनों का प्रदूषण है, न कि थर्मल पावर प्लांट। इस रिपोर्ट के मुताबिक, थर्मल पावर प्लांट सालाना 281 किलो टन सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्सर्जित करते हैं, जबकि पराली जलाने से केवल 17.8 किलो टन सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट सालाना 281 किलो टन सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्सर्जित करते हैं, जो वायु प्रदूषण के एक प्रमुख कारण हैं। वहीं, पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण इससे 16 गुना कम है। इस रिपोर्ट को लेकर सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मौसम की स्थिति भी बढ़ा रही प्रदूषण संकट
दिल्ली में मौसम की स्थिति भी प्रदूषण संकट को और बढ़ा रही है। लगातार रुकी हुई हवा और गिरता तापमान प्रदूषकों को फैलने से रोक रहे हैं। इससे हवा में धूल, धुआं और अन्य हानिकारक कण फंसे हुए हैं। यह प्रदूषक जैसे पराली के धुएं दिल्ली और आसपास के इलाकों में बने रहते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता और खराब हो रही है। इस स्थिति में हवा में मौजूद जहरीले कणों की मात्रा बढ़ रही है, जो दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य के लिए और खतरनाक साबित हो रही है।
थर्मल पावर प्लांट पर सवाल उठते हैं
इस रिपोर्ट के आने के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार को थर्मल पावर प्लांट पर पुनः विचार करना चाहिए? हालांकि, डीपीसीसी ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली में वर्तमान में कोई कोयला आधारित पावर प्लांट नहीं चल रहे हैं, लेकिन क्या फिर भी यह जहर उगलने वाले पावर प्लांटों को दिल्ली से बाहर स्थानांतरित करना चाहिए या अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए? इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने में समय लगेगा, लेकिन प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता अब और बढ़ गई है।
दिल्ली सरकार और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वायु प्रदूषण के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहे हैं और इसको लेकर अब हर स्तर पर गंभीर कदम उठाने की आवश्यकता है।
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